अयोध्या। लगातार हो रही उपेक्षा व अपनी गाढ़ी कमाई समय से न पाने की वजह से प्रमुख नकदी फसल से किसान मुंह मोड़ने लगे हैं।
इस बार गन्ना सर्वेक्षण से प्राप्त हुए आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं जिसमें गन्ना क्षेत्रफल गत वर्ष की अपेक्षा छह प्रतिशत कम दिख रहा है जबकि गत वर्षों में लगातार गन्ना रकबा में इजाफा हो रहा था। यह खेती-बारी के लिए बिल्कुल भी सही नहीं माना जा रहा है।
वर्ष 2016 से 2018 तक गन्ना रकबा में तेजी से इजाफा हुआ। बीते वर्ष 30 प्रतिशत इजाफे के साथ गन्ना रकबा 47284 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
इधर, लगातार दो वर्षों से चीनी मिलों के शोषण व प्रशासन के ढुलमुल रवैये से गन्ना किसान परेशान दिख रहे हैं। पेराई सत्र समाप्ति के बाद भी समय से गन्ना भुगतान न होने से किसान मायूस हैं।
हालात यह है कि अपनी गाढ़ी कमाई पाने के लिए किसान चीनी मिल से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक का दरवाजा खटखटा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से यही हालात होने से अब किसान गन्ना उत्पादन से किनारा कसने लगे हैं। ये बीते दिनों हुए गन्ना सर्वेक्षण की रिपोर्ट से साफ जाहिर है।
जिले में करीब 1.15 लाख किसानों ने गत वर्ष गन्ना बुआई की थी। इसका सर्वेक्षण तीस जून तक समाप्त किया गया। चीनी मिल व सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड की संयुक्त टीम द्वारा जीपीएस मशीन से गन्ना सर्वेक्षण कराया गया है। इससे जो आंकड़े प्राप्त हुए हैं, वे चिंताजनक हैं।
इस बार कुल 44294 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही गन्ना उत्पादन किया गया है। गन्ना विकास परिषद में 31830 व रौजागांव क्षेत्र में 12464 हेक्टेयर है जबकि गतवर्ष 47284 हेक्टयर गन्ना उत्पादन जिले में किया गया था। इसमें मसौधा क्षेत्र में 33896 व रौजागांव क्षेत्र में 13388 हेक्टेयर था। चीनी मिल मसौधा क्षेत्र के किसानों का अधिक बकाया है। इसी क्षेत्र में रकबे में अधिक कमी देखी जा रही है।