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रुदौली की लाल मिर्च व राजा ब्रांड बिस्कुट घटिया

Sat, 06 Aug 2016 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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रुदौली की लाल मिर्च और राजा ब्रांड बिस्कुट जांच में घटिया पाया गया है। सेंट्रल लैब की रिपोर्ट में मिर्च में सिंथेटिक कलर, नॉन परमिटेड कलर, नमी समेत पैकेजिंग और लेबलिंग का दोषी पाया है। जबकि राजा ब्रांड के मक्खन बाइट बटर बिस्कुट में पैकेजिंग और लेबलिंग में मिथ्या छाप कर बेचना पाया गया।
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अब मामले में मुकदमा दायर करने के लिए अभिहित अधिकारी ने दुकानदारों को नोटिस भेजा है। हालांकि इन दोनों उत्पादों के पहले गोरखपुर की लैब ने क्लीनचिट दे दी थी। जिले के रुदौली कस्बे में 24 फरवरी 2015 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक त्रिवेदी ने मिर्च का नमूना संकलित किया था।

कारोबारी शिव प्रसाद मिर्च पिसवाकर पैकिंग कराते हैं। नमूने में निर्माण और एक्सपायर की तिथि अंकित नहीं थी। नमूना संकलित कर जांच के लिए राज्य स्तरीय प्रयोगशाला गोरखपुर भेजा गया। गोरखपुर की रिपोर्ट में किसी प्रकार की अशुद्धि नहीं पाई गई। उसी नमूने को सेंट्रल लैब कोलकाता भेज दिया गया।
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वहां की रिपोर्ट में सिंथेटिक कलर, नॉन परमिटेड कलर, नमी अधिक, पैकेजिंग और लेबलिंग का दोष पाया गया। उधर, गोसाईगंज बाजार के तेलियागढ़ स्थित ज्ञान ट्रेडर्स से दस सितंबर 2015 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी रत्नाकर पांडेय ने राजा ब्रांड के मक्खन बाइट बटर बिस्कुट का नमूना संकलित किया था।

इसी दुकान से इसी ब्रांड का मक्खन बाइट काजूवाला बिस्कुट का नमूना दूसरे खाद्य सुरक्षा अधिकारी सूर्यमणि ने संकलित किया। दोनों नमूने आगरा की लैब में जांच के लिए भेज दिया गया। वहां से भेजी गई रिपोर्ट आठ फरवरी 2016 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हुई।

जांच रिपोर्ट पर संदेह होने पर अभिहित अधिकारी ने दोनों नमूनों को 20 अप्रैल को कोलकाता लैब भेज दिया। एक सितंबर को जो रिपोर्ट आई उसमें मिथ्या छाप कर बिस्कुट बेचना पाया गया। सेंट्रल लैब की रिपोर्ट आने के बाद दोनों कारोबारियों को नोटिस देकर अब मुकदमा चलाने की तैयारी हो रही है।

अभिहित अधिकारी विनीत कुमार पांडेय ने बताया कि रुदौली और गोसाईगंज में संकलित किया गया मिर्च और बिस्कुट का नमूना कम से कम मिथ्या छाप आना चाहिए था। एक्ट में साफ-साफ दर्ज है कि रैपर पर जो कुछ भी लिखा है वह पैकेट के अंदर उतनी मात्रा में होना चाहिए।

लेकिन प्रदेश की लैब ने जब दोनों रिपोर्टों को पास कर दिया तो इन नमूनों को जांच के लिए सेंट्रल लैब भेजा गया। वहां की लैब रिपोर्ट में लाल मिर्च में हानिकारक तत्व मिलाए जाने की पुष्टि हुई हैं, जबकि बिस्कुट में पैकेजिंग और लेबलिंग का दोषी पाया गया है।
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