अयोध्या। अस्थाई मंदिर में श्रीरामलला का अंतिम जन्मोत्सव बृहस्पतिवार को भव्यता पूर्वक मनाया गया। अगले साल 2024 की रामनवमी में 1800 करोड़ की लागत से बन रहे दिव्य-अनुपम राममंदिर में रामलला जन्मेंगे। इसी साल दिसंबर माह तक राममंदिर का गर्भगृह तैयार हो जाएगा। रामलला जनवरी 2024 तक गर्भगृह में स्थापित हो जाएंगे, अगला जन्मोत्सव राममंदिर में मनेगा।
रामलला के हक में नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट से फैसला आया। 25 मार्च 2020 को सीएम योगी ने रामलला को टेंट से निकालकर अपने हाथों से अस्थाई गर्भगृह में विराजित किया। इसके बाद पांच अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर का भूमिपूजन कर एक नए इतिहास की नींव रखी। टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजते ही रामलला के ठाठ-बाट में निरंतर वृद्धि होती रही। उत्सव-समैया का भी भव्य आयोजन होने लगा। अस्थाई मंदिर में अब तक तीन बार रामलला का जन्मोत्सव मनाया गया। पहले से तीसरे जन्मोत्सव तक निरंतर इस उत्सव की भव्यता बढ़ती रही।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस बार अस्थाई गर्भगृह में अंतिम बार रामलला का जन्मोत्सव मनाया गया। इसलिए राजसी भव्यता देने की कोशिश की गई। पहली बार रामलला ने सोने का मुकुट धारण किया। गर्भगृह में कलाकारों ने मंगल गान, बधाई गान गाया। छत्तीसगढ़ से आए रामनामी समाज के सदस्यों ने नृत्य प्रस्तुत कर जन्मोत्सव का आकर्षण बढ़ाया। पहली बार रामलला को 10 कुतंल पंजीरी का भोग अर्पित किया गया।
दिसंबर 2023 तक राममंदिर का भूतल यानि कि गर्भगृह तैयार हो जाएगा। अब तक भूतल का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। जल्द ही गर्भगृह की छत ढालने का भी काम शुरू हो जाएगा। मकर संक्रांति 2024 तक रामलला की गर्भगृह में स्थापना की तैयारी है। इसलिए रामलला अगली बार 1800 करोड़ की लागत से बन रहे सोने व चांदी से मंडित गर्भगृह में जन्म लेंगे। अगला जन्मोत्सव कितना भव्य होगा, यह अभी से बता पाना संभव नहीं है, पर यह तय है कि अगला जन्मोत्सव रामनगरी के लिए ऐतिहासिक होगा।