श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के 78वें जन्मोत्सव के बहाने राम मंदिर आंदोलन को धार देने की कवायद फुस्स साबित हुई है। साल-दर-साल ऐसे आयोजनों में संत-धर्माचार्यों के तेवर देखने लायक होते थे, तो विहिप की अंगड़ाई हलचल पैदा करती थी। मगर अशोक सिंहल के निधन के बाद नौ दिन तक हुए इस जमावड़े में पहली बार राम मंदिर राग मंद होता दिखा।
आखिरी दिन जगतगुरू रामभद्राचार्य ने आत्मदाह की चेतावनी तो दी, मगर अकेले पड़ गए। केंद्रीय मंत्रियों समेत महंत आदित्यनाथ के तेवर भी ढीले रहे। विहिप की कमान संभाल रहे डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया आए ही नहीं।
अयोध्या में नौ दिन तक चले श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में पहली बार अयोध्या-काशी-मथुरा का नारा नहीं गूंजा। जबकि मोदी सरकार बनने पर सिंहल के नरम रुख पर यहां आए विहिप कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया नाराज दिखते थे। अब जबकि उन्हें पूरा मौका था और दस्तूर भी, फिर भी कार्यक्रम देकर अयोध्या आने से ही परहेज किया।
हालांकि राज्यपाल रामनाईक ने जयश्रीराम का नारा 10 जून को उद्घाटन समारोह के आखिर में जरूर दिया, लेकिन बाद में आए केंद्र सरकार के मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, रामकृपाल यादव व कलराज मिश्र हों या प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य सबने राम मंदिर पर आम सहमति या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुलम्मा चढ़ा किनारा कर लिया।
आखिर दिन शनिवार को पद्मभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने जरूर 2018 की डेडलाइन पर आत्मदाह की चेतावनी देकर हलचल पैदा की, मगर पहले की तरह मंच पर बैठे संत-धर्माचार्यों समेत भाजपा नेताओं का स्वर नहीं गूंजा।
अब यह बात मस्जिद गिराने वालों के समझ में भी आ गई कि देश का कानून सबसे ऊपर है। रामभद्राचार्य को आत्मदाह की जरूरत क्यों पड़ रही है। अब तो केंद्र में उनकी मोदी सरकार है। हम तो बार-बार मांग कर रहे हैं कि मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट से डे-टू-डे सुनवाई कराए। हम चाहते हैं कि बाबरी मस्जिद का फैसला जीते जी आए। -हाशिम अंसारी, मुद्दई बाबरी मस्जिद
जन्मोत्सव में संत-धर्माचार्य इस बात पर एकजुट रहे कि भव्य राम मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द हो। कहा भी गया कि सरकार राम मंदिर मुद्दे पर बनी है, विकास के मुद्दे पर नहीं। हम सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, चाहते हैं कि जल्द से जल्द कोर्ट समाधान करे। लेकिन देर न हो, इसलिए केंद्र सरकार से भी संतों ने राम मंदिर के लिए कानून बनाने की मांग उठाई है। तोगड़िया जी इसलिए नहीं आ सके कि वे अस्वस्थ थे। -शरद शर्मा, प्रांतीय प्रवक्ता, विहिप