इन सभी देशों में होने वाली रामलीलाओं पर शोध कर संग्रहित करने के लिए संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के अयोध्या शोध संस्थान ने चरणबद्ध तरीके से पांच वर्षों की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण का प्रकाशन किया जाएगा।
ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण की मूल भाषा अंग्रेजी ही होगी। इसके साथ ही इसका प्रकाशन भारत के अलग-अलग प्रांतों की क्षेत्रीय भाषाओं में भी किया जाएगा। इस विश्वकोश को तैयार करने में देश-विदेश के करीब 50 हजार विद्वान, रामायण मर्मज्ञ, संस्कृति कर्मी और साहित्यकारों का बतौर शोधकर्ता योगदान लिया जाएगा। रामायण पर विश्वकोश का प्रत्येक खंड 1100 पृष्ठों का होगा।
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह का कहना है कि अयोध्या शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर भी काम कर रहा है। दुनिया के 120 देशों में रामकथा व रामलीलाएं होने के साक्ष्य मिले हैं। संस्थान उन देशों के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व कलाकारों से यह शोध कराएगा।