अयोध्या। रामनगरी में राम की सबसे ऊंची प्रतिमा लगाने की कवायद शुरू हो चुकी है। राम की सबसे बड़ी प्रतिमा लगाने के लिए जमीन खरीदने की स्वीकृति शासन से मिल गई है। किसानों से जमीन खरीदने के लिए राज्यपाल ने क्षेत्रीय पयर्टन अधिकारी आरपी यादव को नामित किया है।
मीरापुर दोआबा में लगभग 61 हेक्टेयर जमीन भगवान राम प्रतिमा के लिए खरीदी जानी है। एक सप्ताह के भीतर जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रतिमा स्थापना के लिए 117 करोड़ की पहली किश्त भी शासन ने जारी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट को राममंदिर पर काम शुरू होने के पहले शुरू करने पर ही मंथन चल रहा है।
रामनगरी में राम प्रतिमा स्थापित करने के काम में तेजी आ रही है। विशाल प्रतिमा प्रोजेक्ट की डिजाइन को तैयार कर दिसंबर 2019 तक ऑकिटेक्ट से फाइनल करवाने का लक्ष्य है। शासन से जमीन खरीदने की स्वीकृति भी मिल गई है। जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी को जमीन खरीदने का पत्र भेज दिया है। कुल 61 हेक्टेयर भूमि क्रय की जानी है।
इसके लिए क्षेत्रीय पयर्टन अधिकारी को नामित किया गया है। इससे पहले 24 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए पयर्टन विभाग ने नोटिफिकेशन कर रखा है। तीन सौ से ज्यादा किसानों की रजिस्ट्री पर्यटन विभाग के नाम से कराई जानी है। प्रोजेक्ट को लेकर सभी तकनीकी खामियों को दूर कर, एनजीटी, एनएचआई, सिंचाई व प्रदूषण विभाग से एनओसी हासिल करने की समय सीमा मई 2020 तय कर दी गई है।
इसके अलावा प्रोजेक्ट का सीएसआर खाता खोलवाने व इसकी डिजाइन का समय से आरएफपी, आरएफक्यू करवाने का भी निर्देश शासन से दिया गया है। अयोध्या में स्थापित होने वाली विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 251 मीटर लंबी होगी। 50 मीटर पेडेस्टेल की ऊंचाई, 178 मीटर लंबी प्रतिमा एवं 23 मीटर मूर्ति की छतरी होगी।
श्रीराम की प्रतिमा के अलावा आस-पास के इलाके को पर्यटन के अनुकूल बनाने की भी योजना है। इस परिसर को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने की योजना है। अधिग्रहीत भूमि पर डिजिटल म्यूजियम और रीवर फ्रंट श्रद्धालुओं के आकर्षण के प्रमुख केंद्र होगा। भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंडस्केपिंग समेत पर्यटकों के लिए अन्य आकर्षण होंगे।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि जमीन खरीदने के लिए शासन से स्वीकृति मिल गई है। एक सप्ताह में जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 117 करोड़ की पहली किश्त मूर्ति स्थापना के लिए शासन से जारी की जा चुकी है। मई 2020 से मूर्ति लगाने का काम शुरू कर तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य है।