अयोध्या। अयोध्या मामले में आए फैसले की खुशी रामनगरी में अब नजर आने लगी है। अयोध्या का अमन, चैन, सद्भाव व शांति यह बयां कर रहा है कि हर वर्ग के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सहर्ष स्वीकार किया है। फैसले के दस दिन बीतने को है अयोध्या अब अपनी रौ में लौट चुकी है। बंदिशों में ढील दी जा रही है तो भक्तों का बेरोकटोक आना-जाना जारी है। दूसरी तरफ नगरी के हर नुक्कड़-नाके, पर बस एक ही विमर्श छिड़ा है कि रामलला का बनने वाला मंदिर भव्यतम हो। राममंदिर की भव्यता-दिव्यता संग ट्रस्ट की चर्चा में रामनगरी मशगूल हो चुकी है।
अयोध्या का जनजीवन पटरी पर लौट चुका है। प्रतिदिन हजारों भक्तों का आवागमन अयोध्या के सौहार्द को और गाढ़ा करने का का कर रहा है। अयोध्या में संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा सख्त है, मगर अब बंदिशें काफी कम रह गई हैं। भक्तों का बेरोक टोक आना-जाना जारी है। इस बीच अब सिर्फ एक चर्चा है कि कोर्ट के फैसले के राममंदिर की भव्यता-दिव्यता कैसी होगी। अयोध्या के तीर्थ नगर के रूप में विकास का मॉडल कैसा होगा। साथ ही ट्रस्ट में कौन-कौन होंगे और मुखिया कैसे तय होगा।
नयाघाट पर सुबह करीब 9:30 बजे एक दुकान पर चाय पी रहे कैलाश मिश्र कहते हैं सदियों के संघर्ष के बाद यह दिन देखने को मिलेगा हमें तो दिव्य व भव्य मंदिर चाहिए ट्रस्ट भी ऐसा बने जो निर्विवादित हो। यहीं मौजूद महंत हनुमान दास कहते हैं कि ऐसा मंदिर बने जैसा दुनिया में दूसरा न हो। मौका मिला है तो राममंदिर को भव्यता देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए। हम साधु-संत जिस दिन भव्य राममंदिर में हमारे रामलला विराजेंगे उसकी खुशी इस तरह मनाएंगे कि त्रेतायुग रामनगरी में जीवंत प्रतीत होता दिखेगा।
कुछ दूर आगे बढ़ने पर छात्र रवि शर्मा कहते हैं कि ट्रस्ट का स्वरूप अब जल्द तय कर राममंदिर निर्माण की भूमिका सबके सामने रखनी चाहिए। हमें तो राममंदिर बनने के साथ-साथ अयोध्या की तरक्की का भी इंतजार है। रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में राजस्थान, गुजरात, बिहार के श्रद्धालुओं का जत्था राममंदिर के लिए तराशे गए पत्थर को एक टक से निहार रहा था, मानों उन पत्थरों में उन्हें राम की छवि नजर आ रही थी।
सांता बेन बोलती हैं कि अब इन पत्थरों के भी दिन बहुरने वाले हैं राममंदिर में जो इनका प्रयोग है। राजस्थान के अखिलेश कुमार बोले कि मंदिर ऐसा बनना चाहिए जो कि अतुलनीय एवं अलौकिक हो। बताया कि अयोध्या की धार्मिक आभा तो राममंदिर निर्माण से ही निखरेगी।
रामनगरी भक्तों से गुलजार है तो बंदिशों में भी ढील दी जा रही है। कई स्थानों पर बैरियर हटा दिए गए हैं लेकिन, रामकोट क्षेत्र को अभी भी बंदिशों से मुक्ति नहीं मिली है। हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामजन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्गों पर अभी बैरियर लगे हुए हैं। स्थानीय लोगों एवं साधु-संतों का कहना है कि अब अयोध्या सामान्य हो चुका है ऐसे में रामकोट में भी ढील दी जानी चाहिए।
उधर निर्मोही अखाड़ा ने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से समय मांगा है। निर्मोही अखाड़ा ने इसके लिए एक प्रतिवेदन प्रधानमंत्री को भेजा है। निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता प्रभात सिंह ने बताया कि सोमवार को जिलाधिकारी अनुज कुमार झा से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ई-मेल भी किया गया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में निर्मोही अखाड़ा का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिलना चाहता है। निर्मोही अखाड़ा प्रधानमंत्री से मिलकर राममंदिर ट्रस्ट में शामिल होने के लिए अनुरोध करेगा।