अयोध्या के कायाकल्प की भी तैयारी तेज हो गई है। अयोध्या के सौंदर्यीकरण और बाईपास निर्माण के लिए 55 करोड़ रुपये की राशि एनएचएआई की ओर से जारी की गई है। इस राशि से भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में एनएचएआई की ओर से दो तरह के कार्य किए जाएंगे, जिससे न केवल अयोध्या में आवागमन सुगम होगा, बल्कि उसके साथ-साथ भगवान श्रीराम की इस जन्मभूमि का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।
अयोध्या बाईपास पर राम की गाथा का चित्रण किया जाएगा ताकि बाईपास से गुजरते ही राम जन्मभूमि का अहसास हो जाए। सौंदर्यीकरण के लिए भगवान श्रीराम के जीवन वृत्तांत का दीवारों पर चित्रण, लैंडस्कैपिंग, हरे-भरे पौधे और वृक्ष, साथ ही साथ फव्वारे और रंग बिरंगी रोशनी की जाएगी। अगले साल मार्च-अप्रैल तक अयोध्या बाईपास का काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। अयोध्या बाईपास और अंडरपास पर सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
युवा पीढ़ी को राममंदिर का इतिहास बता रही विहिप
राममंदिर निर्माण शुरू होने से पूर्व विश्व हिंदू परिषद युवा पीढ़ी को राममंदिर संघर्ष के इतिहास से रूबरू कराने की तैयारी में है। इसके लिए विहिप की ओर से मंदिर निर्माण के संघर्ष के इतिहास का पत्रक बांटा जा रहा है। अयोध्या में राममंदिर निर्माण की शुरुआत होने के कुछ दिन बाद नौ अगस्त को विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस भी है।
इस दौरान 9 अगस्त से 16 अगस्त तक चलने वाले स्थापना दिवस समारोह के सहारे विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण की खुशी को हर हिंदू परिवार से जोड़ने की रणनीति बनाई है। विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण के संघर्ष के इतिहास के मुख्य बिंदुओं का एक पत्रक तैयार कराया है। इसमें मंदिर निर्माण आंदोलन के शुरुआत से लेकर संघर्ष के मुख्य बिंदुओं को युवा पीढ़ी पिछले वर्ष नवंबर में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शामिल किया गया है।
विश्व हिंदू परिषद ने राममंदिर निर्माण को हिंदुत्व के साथ राष्ट्रचेतना का प्रतीक बनाने की भी रणनीति तैयार की है। विश्व हिंदू परिषद ने बौद्ध, सिख और जैन सहित हिंदू आस्था से जुड़े हर तीर्थ स्थल से अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए 50 ग्राम मिट्टी और हर नदी से अधिकतम 100 मिली. पानी लाने की योजना बनाई है। इसके लिए देश भर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। ये कार्यकर्ता देश भर से मिट्टी और जल लेकर तीन अगस्त तक अयोध्या पहुंच जाएंगे।
सोशल मीडिया पर भी छेड़ी मुहिम
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि देश के तीन लाख स्थानों सहित 52 देशों से लोगों ने सहयोग किया था। यह शिलाएं वर्तमान में रामघाट क्षेत्र में रखी हुई हैं। वे कहते हैं कि युवा पीढ़ी को केवल पत्रक के ही जरिए नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी राममंदिर आंदोलन के इतिहास से लेकर राममंदिर निर्माण शुरू होने तक की जानकारी दी जा रही है। विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीश सिंह ने यह जिम्मेदारी संभाल रखी है।