अयोध्या। रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शनिवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने हनुमानगढ़ी पहुंचकर बजरंग बली के दरबार में हाजिरी लगाई। उसके बाद रामजन्मभूमि परिसर का करीब तीन घंटे तक निरीक्षण किया।
इसके बाद वह विहिप की श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला पहुंचे। जहां करीब आधे घंटे तक मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने तराशी गई शिलाओं से लेकर मंदिर के मॉडल तक के बारे में जानकारी हासिल की। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें राममंदिर आंदोलन के साथ तीस साल की कड़ी मेहनत से तैयार शिलाओं और उसकी कारीगरी को समझाया।
कार्यशाला पहुंचते ही मंदिर के गेट पर रखे मॉडल के बारे में चंपत राय ने बताया कि मॉडल चंद्रकांत सोमपुरा द्वारा तैयार किया गया है। यहां 268 फिट लंबा और 128 फिट ऊंचा है। उन्होंने बताया कि मॉडल के अनुसार मंदिर का आधा हिस्सा खुला रहेगा और आधा हिस्सा कवर रहेगा।
फर्श संगमरमर की होगी। 10 फिट का रास्ता परिक्रमा के लिए बनाया जाएगा। तराशे गये खंभों के बारे में बताया कि 106 खंभे तराशे जा चुके हैं जो कि पहली मंजिल में प्रयोग होंगे। खंभों की ऊंचाई साढ़े 16 फिट है। 20 फिट पर मंदिर का दूसरा फ्लोर होगा।
पहले व दूसरे फ्लोर की दीवारें बनकर तैयार हैं। दीवारों के नीचे आरसीसी का प्लेटफॉर्म बनेगा। उन्होंने बताया कि ये सभी पत्थर हाथ से कारीगरों ने बनाए हैं मशीन का उपयोग नहीं किया गया है। उन्होंने पत्थरों पर की गई नक्काशी के बारे में भी बताया।
निर्माण समिति के अध्यक्ष ने पत्थरों को देखने के बाद कहा कि ये पत्थर पुराने हो चुके हैं, नक्काशी भी कई जगह एक तरीके की न होकर अलग-अलग दिखी। इस पर चंपत राय ने कहा कि पत्थरों को धुलते ही ये सभी पत्थर एक रंग में नजर आने लगेंगे। नक्काशी कुशल कारीगरों द्वारा की गई है। चंपत राय ने बताया मंदिर के गर्भगृह के लिए पत्थरों की तराशी का काम पूरा हो चुका है करीब सवा लाख घनफुट पत्थर तराशे जा चुके हैं। इस दौरान रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, कामेश्वर चौपाल, डीएम अनुज कुमार झा सहित अन्य मौजूद रहे।
जूट के गद्दों के बीच परिसर तक जाएंगी शिलाएं
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सवाल उठाया कि तराशी गई शिलाएं रामलला परिसर में कैसे जाएंगी। चंपत राय ने बताया कि जूट के एक फिट मोटे गद्दे बनाने पड़ेंगे, जिसे शिला के चारों तरफ रखकर उसके अगल-बगल और ऊपर दूसरी शिलाएं रखी जाएंगी ताकि कहीं कोई डिजाइन में टूट-फूट न हो। उन्होंने बताया कि शिलाओं को क्रेन से उठाकर लादने में भी रस्सी या लोहे के जंजीर का प्रयोग नहीं होगा। बल्कि शिलाओं को बड़े टायरों में फंसाकर उठाया जाएगा और इसी तरह उतारा जाएगा।
होली बाद शुरू होगी पत्थरों की सफाई
30 साल से रामजन्मभूमि कार्यशाला में खुले आसमान में रखे तराशे गए पत्थरों की चमक धूमिल हो गई है। अधिकांश पत्थरों में काई जम गई है उनका रंग उड़ गया है। अब इन पत्थरों को फिर से चमकाने का काम तेज किया जाएगा। कार्यशाला में रामंमदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को राममंदिर की तैयारियों की जानकारी देते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि तराशे गए पत्थरोें को चमकाने का काम होली बाद से तेज कर दिया जाएगा। इसके लिए कारीगर बुलाए गए हैं होली पर्व के बाद पत्थरों की सफाई आदि का काम भी तेज कर दिया जाएगा।
रामशिलाओं को परिसर में ही रखवाया जाएगा
कार्यशाला में जमा की गईं रामशिलाओं को सहेजा जाएगा इसके लिए राममंदिर मॉडल के आकार का ही एक मंदिर राममंदिर परिसर में बनेगा। 1989 में चले शिलापूजन अभियान में देश-विदेश से पौने तीन लाख शिलाएं पूजित कर रामजन्मभूमि कार्यशाला में लाकर सुरक्षित रखी गईं थीं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र को रामशिलाओं के इतिहास से रूबरू कराते हुए बताया कि शुरूआती दौर में इन शिलाओं में फकीरे राम मंदिर में रखा गया था बाद में उन्हें रामजन्मभूमि कार्यशाला में लाकर रखा गया। 55 देशों से करीब पौने तीन लाख राम शिलाएं एकत्र की गईं थीं जिन पर विभिन्न भाषाओं में राम नाम अंकित है। उन्होंने बताया कि इन शिलाओं को मंदिर परिसर में ही रखवाया जाएगा।