अयोध्या। अयोध्या के मंदिर-मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक के विवाद पर पिछले साल 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर अमल की घड़ी नजदीक आती दिख रही है। रामनगरी के संतों एवं विहिप को उम्मीद है कि सरकार तय समय सीमा के भीतर ही ट्रस्ट गठन की कार्रवाई पूरी कर लेगी।
हालांकि ट्रस्ट गठन में हो रही देरी को लेकर साधु-संतों की व्याकुलता भी बढ़ती जा रही है। संतों का कहना है कि सरकार को ट्रस्ट निर्माण में देर नहीं करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यह ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर बनाने के तौर तरीके तय करेगा।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन और मस्जिद के लिए जमीन देने की पेशकश की एक सप्ताह के भीतर घोषणा किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे का निपटारा करते हुए ट्रस्ट के गठन और मस्जिद के लिए जमीन देने का निर्णय किया था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर निर्माण के वास्ते ट्रस्ट बनाने के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार किया जा चुका है और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाने वाली जमीन की पहचान भी की जा चुकी है। समूचा प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलने के बाद ट्रस्ट की घोषणा और मस्जिद के लिए पांच एकड़ का प्लाट देने की पेशकश संभवत: एक सप्ताह के भीतर की जाएगी। रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य महंत कमलनयन दास कहते हैं कि 2 अप्रैल को रामनवमी पड़ रही है।
तैयारी कुछ इस तरह से की जा रही है कि रामनवमी के अवसर पर रामजन्म भूमि पर मंदिर का शिलान्यास एक भव्य समारोह में किया जाए। अयोध्या में राम मंदिर के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट गुजरात के सोमनाथ मंदिर और जम्मू के वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का मिलाजुला रूप होगा।
सोमनाथ मंदिर के ट्रस्ट में तो 6 ही सदस्य हैं मगर अयोध्या के ट्रस्ट में यह संख्या और अधिक रहेगी। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि ट्रस्ट निर्माण की मियाद 9 फरवरी को पूरी हो रही है। इससे पूर्व ही सरकार ट्रस्ट गठन की कार्रवाई पूरी कर लेगी। अगले कुछ ही दिनों में ट्रस्ट का स्वरूप सबके सामने होगा और राममंदिर निर्माण में गति आएगी।
इन नामों की है चर्चा
ट्रस्ट में शामिल किये जाने वालों में जो नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। उनमें रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास, निर्वाणी अनि अखाड़े के महंत धर्मदास (इनके गुरू महंत अभिरामदास रामलला के पुजारी थे)। इनमें कुछ अन्य बड़े धर्मगुरू, राम मंदिर आन्दोलन से जुडे संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल किए जा सकते हैं।