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अयोध्या की बाजारों में भी घुला है सौहार्द का रंग

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बाजार में उमड़ी भीड़। - फोटो : FAIZABAD
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सात दशक से कायम है इनका भाईचारा
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डाकखाना तिराहे पर अब्दुल अलीम की छोटी सी दुकान पर अमृतराज वैश्य बैठे मिले, दोनों बातचीत में मशगूल थे। बात करने पर अब्दुल अलीम ने कहा कि हमारा भाईचारा तो दादा-परदादा के जमाने से कायम है।
हम लगभग 70 सालों से एक साथ अगल-बगल ही कारोबार करते हैं, कभी कोई दिक्कत नहीं आई। अमृतराज किराना की दुकान करते हैं वे बोले कि अब्दुल अलीम चचा से हमेशा प्रेम मिलता है।
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हम सभी एक दूसरे के सुख-दुख में बराबर के सहभागी हैं। शादी, विवाह, निकाह आदि में हमारी भागीदारी बढ़ चढ़कर होती है। यहां कोई तल्खी या तनाव नहीं है। अलीम चचा ने कहा कि विवाद खत्म होगा तो अयोध्या का स्वरूप चमकेगा, पयर्टक आएंगे तो हमारा कारोबार भी बढ़ेगा।
फैसला आने के बाद बंद होगी राजनीतिक दुकानदारी
श्रृंगारहाट की मशहूर रहमत चूड़ी वाले की दुकान पर बैठे शिवप्रकाश तिवारी कहते हैं कि सामने मेरी भी लंबे समय से दुकान है। खाली समय में हम सभी एक साथ बैठते हैं।
तभी दुकानदारी में व्यस्त करीब 80 वर्षीय रहमत अली कहते हैं, मियां..हमारा सौहार्द हमेशा ही रहा है। ये तो राजनीतिक नेताओं ने मामले को उलझाने का काम किया। अच्छा है अयोध्या मामले का फैसला आने के बाद राजनीतिक दुकानदारी तो बंद हो जाएगी।
कहा कि इस विवाद के कारण यहां से ज्यादा बाहर के लोग डरे रहते हैं, विवाद ने अयोध्या को पीछे कर दिया, लोग अयोध्या में कम आएंगे तो कारोबार कहां से होगा, अयोध्या का रोजगार तो बाहर के लोगों पर ही टिका है। कहा कि हमारी दुकान पर भी तो हिंदु समाज के महिलाएं ही अधिक आती हैं, कभी दिक्कत नहीं हुई।
अयोध्या। अयोध्या विवाद में आने वाले फैसले की आशंकाओं के बीच रामनगरी में पग-पग पर सौहार्द नजर आता है। यहां के बाजारों में भी सौहार्द का रंग गहराई से घुला हुआ है। दशकों से हिंदू-मुस्लिम एक साथ अमन-चैन के साथ कारोबार करते हैं कभी कोई दिक्कत नहीं आती।
रामनगरी के मुख्य मार्ग पर स्थित श्रंगारहाट बाजार सौहार्द की मिसाल हैं। यहां हिंदु भाईयों के बीच करीब एक दर्जन मुस्लिम कारोबारी दशकों से अपना कारोबार सद्भावपूर्वक कर रहे हैं। यही नहीं एक दूसरे के सुख-दुख मे भी ये कारोबारी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इनका कहना है कि हमारा सौहार्द ही हमारी पहचान है। अयोध्या मामले में कोई भी फैसला आए हमारे रिश्तों पर कोई भी आंच नहीं आएगी।
अयोध्या में करीब 12 हजार की मुस्लिम आबादी है जो हिंदुओं के साथ रहती है, कारोबार करती है। अयोध्या की मुख्य बाजार र्श्ृंगारहाट भी लंबे समय से सौहार्द की अलख जगा रही है। श्रंगारहाट में करीब 40 वर्षों से प्रसाधन की दुकान करने वाले सईद अहमद कहते हैं कि हमें हमारे समाज से कहीं अधिक प्रेम हिंदु समाज ने दिया है।
चार दशक हो गये अयोध्या में दुकानदारी करते लेकिन कारोबार पर कभी किसी भी स्थिति में आंच नहीं आई। जब भी मुसीबत में आए तो सभी ने पूरी मदद की, सहारा दिया। अयोध्या विवाद में फैसला आना जरूरी है, फैसले से हमारे भाईचारे में कमी नहीं आएगी।
जूता-चप्पल का व्यवसाय करने वाले बाबू ने कहा कि कभी भी कोई विवाद नहीं हुआ। हमारा इनका साथ कट्टरपंथियों के लिए एक सबक भी है। करीब पांच दशक से अयोध्या कोतवाली के पास चूड़ी का व्यापार करने वाले भोला कहते हैं कि यह विवाद देखते-देखते उमर बीत गई।
यहां तो अमन, चैन, प्रेम, सद्भाव का रस घुला हुआ है, हम अल्लाह से कामना करते हैं अयोध्या को किसी की नजर न लगे, भाईचारा कायम रहे। चांद टेलर बताते हैं कि बड़ी संख्या में हिंदू त्योहारों पर भी उनके पास कपड़े सिलवाने के लिए भीड़ लगती है।
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अयोध्या ने विवाद को कभी जगह नहीं दी, यह तो राजनीति का शिकार हुई नहीं तो अयोध्या ने हमेशा सौहार्द का ही संदेश दिया है। अतीक अहमद के पास खड़े शशिकांत त्रिपाठी बोले कि यहां हिंदु-मुस्लिम भाई हमेशा साथ रहे हैं। अतीक ने कहा कि 1990,92 जैसे हालातों में भी मुस्लिम भाईयों ने ही हमें संरक्षण प्रदान किया था, इससे बड़ा सौहार्द और क्या हो सकता है। तभी पास से गुजर रहे खालिक रुके और कहा कि अयोध्या मामले में फैसला कुछ भी आए हम उसका स्वागत करेंगे। हमें उम्मीद है कि फैसले से भाईचारा बढ़ेगा, अयोध्या की तरक्की होगी।
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