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लघु फिल्म के जरिए विहिप बता रही राममंदिर की विजय गाथा

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अयोध्या। राम भक्तों को राममंदिर से जोड़ने के लिए विहिप लघु फिल्म के जरिए राममंदिर की विजय गाथा बता रही है। विहिप द्वारा 18 मिनट की इस लघु फिल्म को इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर शेयर किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग राममंदिर की विजय गाथा से रू-ब-रू हो सकें। इस लघु फिल्म में 1528 से शुरू हुए राममंदिर के संघर्ष से लेकर राममंदिर निर्माण शुरू होने तक की जानकारी राम भक्तों को बेहतर ढंग से उपलब्ध कराने का प्रयास है।
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प्रसिद्ध फिल्म निर्माता व निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने ‘श्रीराम जन्मभूमि की विजय गाथा’ नामक यह लघु फिल्म तैयार की है। 18 मिनट की इस फिल्म में 1528 ई. से लेकर अब तक की पूरी कहानी दर्शाई गई है। फिल्म की शुरूआत 1528 से शुरू हुई राममंदिर के संघर्ष की कहानी से हुई है। बताया गया है कि विदेशी आक्रांताओं ने किस तरह देश के हिंदू मंदिरों को नष्ट किया। किस तरह मुगल आक्रांता बाबर द्वारा राममंदिर को तोड़ा गया। सरयू कई बार रक्त से लाल हुई।
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद राममंदिर मुक्ति को लेकर उमड़े आस्था के ज्वार को भी बखूबी दर्शाया गया है। अचानक 23 दिसंबर 1949 को विवादित भूमि में रामलला के प्रकट होने व इसके बाद की राजनीतिक स्थितियों की जानकारी है। अयोध्या मामले को लेकर शुरू हुई अदालती कार्रवाई से लेकर राममंदिर की मुक्ति के लिए विहिप के 1984 में हुए धर्म संसद, रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन, रामजानकी रथयात्रा से राममंदिर के लिए रामभक्तों की व्यग्रता को दिखाया गया है। टेंट में सीखचों के बीच विराजमान रामलला की स्थिति भक्तों को भावुक करती है।
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इसके साथ ही 9 नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में आए ऐतिहासिक निर्णय को भारत के स्वाभिमान का विजय बताते हुए मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन से लेकर 5 अगस्त को पीएम मोदी के हाथों हुए राममंदिर के भूमिपजन को दर्शाने के साथ ही फिल्म का समापन किया गया है। 1989 में विहिप द्वारा 2.75 लाख गांवों में किए गए रामशिला पूजन व दलित कामेश्वर चौपाल द्वारा 9 नवंबर 1989 को किए गए मंदिर निर्माण के पहले शिलान्यास को बेहतर ढंग से दर्शाया गया है। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से मंदिर के समर्थन में उमड़े ज्वार का बखूबी वर्णन है।
30 अक्तूबर व 1 नवंबर को हुई कारसेवा को दर्शाते हुए बताया गया है कि इस आंदोलन में देश की विराट एकात्मता का दर्शन हुआ। उस दौरान ‘राम’ पर लगे प्रतिबंध, किस तरह अयोध्या छावनी में तब्दील हो गई थी, अर्थी ले जा रहे लोगों को रोका गया इसको भावुकता पूर्वक दर्शाया गया है। 6 दिसंबर को हिंदुमय ज्वार को दर्शात हुए बाबरी विध्वंस के साथ हिंदुओं के शौर्य का बखान भी किया गया है। फिल्म में इस क्षण को सत्यमेव जयते का क्षण बताया गया है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भी दो दिन पहले अपने फेसबुक पेज पर 18 मिनट की लघु फिल्म ‘श्रीराम जन्मभूमि की विजयगाथा’ को पोस्ट किया है। जिसे रामभक्तों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। दो दिनों के भीतर अब तक अब तक 13 हजार लोग इस लघु फिल्म को देख चुके हैं जबकि 680 लोगों ने अब तक फिल्म को शेयर किया है। विहिप के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विश्व हिंदू परिषद अपने अधिकृत ट्विटर हैंडल और इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर इस फिल्म को शेयर कर रही है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक संख्या में लोगों तक यह विजय गाथा पहुंचे और उन्हें राम से जोड़ा जा सके।
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