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राममंदिर के लिए आज से शुरू होगा तीन और टेस्टिंग पिलर का निर्माण

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में नींव खोदाई के लिए पाइलिंग टेस्टिंग का काम शुरू हो चुका है। इसके तहत एक टेस्ट पिलर बनकर तैयार हो गया है। अब तीन और पाइलिंग बनाने का काम सोमवार से ड्रिलिंग रिंग मशीनों के जरिए शुरू होगा।
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एलएंडटी के इंजीनियर बताते हैं कि चारों पिलर राममंदिर नींव के चारों कोनों पर तैयार किए जा रहे हैं। एक माह बाद इन पर एक साथ भार रखकर विशेषज्ञों की टीम क्षमता परखेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शेष 1196 पिलरों का काम शुरू होगा। माना जा रहा है कि नवरात्र से राममंदिर के संपूर्ण फाउंडेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा।
राममंदिर के निर्माण के लिए नींव में कुल 1200 पिलर तैयार किए जाएंगे। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में रविवार को कोई काम नहीं हुआ, क्योंकि मजदूरों को छुट्टी दी गई थी। अब सोमवार से शेष टेस्ट पिलर का काम आगे बढ़ेगा।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के लिए पाइलिंग टेस्टिंग कार्य के तहत एक पिलर का काम पूरा हो चुका है। ऐसे तीन और पिलर तैयार किए जाएंगे, जिनका काम सोमवार से शुरू हो जाएगा। शेष तीन पिलर का काम भी तीन से चार दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
उसके एक माह बाद पिलरों की क्षमता की जांच चेन्नई आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम करेगी, उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही शेष पिलरों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। कहा कि हमारा प्रयास है कि नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में ही राममंदिर की नींव खोदाई काम प्रारंभ कर दिया जाए।
परिसर में पत्थरों को रखने की शुरू हुई व्यवस्था
राममंदिर निर्माण के लिए शेष पत्थरों की तराशी रामजन्मभूमि परिसर में ही की जाएगी। परिसर में पत्थरों को रखने की व्यवस्थाएं मंदिर निर्माण एजेंसी एलएंडटी ने शुरू कर दी है। इसके लिए परिसर में 500/200 फीट के दो बड़े स्थान और मजदूरों को काम करने के लिए 100/100 फीट के इलाके की सफाई हो रही है। अब तक राममंदिर के लिए पत्थरों की तराशी का काम रामघाट स्थित रामजन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में होता रहा है।
यहां राममंदिर की पहली मंजिल के करीब सवा लाख घनफुट पत्थर तराश कर रखे गए हैं। अब चूंकि राममंदिर निर्माण का काम शुरू हो चुका है इसलिए अब शीघ्र इन पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर में पहुंचाया जाएगा। राममंदिर निर्माण में अभी करीब तीन लाख घनफुट पत्थरों की और जरूरत पड़ेगी जो बंशीपुर राजस्थान से सीधे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे जहां पत्थरों को तराश कर राममंदिर निर्माण में प्रयोग किया जाएगा।
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