अयोध्या। अयोध्या को आदत है तनाव के मंजरों की। 1989 में तनाव-फसाद-संगीनों और बूटों की पदचापों की मजबूत गवाह यह मर्यादा भूमि। मगर पिछले एक हफ्ते अलहदा बंदिशों से हलकान थी।
सुरक्षा के तामझाम पाबंदियां लगाए थे तो राम-राम जपकर आराम पाती अयोध्या का दामन मंदिर निर्माण की सदानीरा खुशियों से भरने जा रहा था। अंतत: सुरक्षा बलों के पहरे से मुक्त एक नई सुबह के साथ रामनगरी की ऊर्जा भरी शांति लौट आई। मंदिर-शिवालय-दुकानें फिर खुल गईं।
सड़कों पर चहलकदमी दिखने लगी। लेकिन जिस रौनक से अयोध्या की पहचान है। उसके लौटने का इंतजार अभी कुछ लंबा रहेगा, हालांकि राममंदिर के भूमिपूजन से लोगों की उम्मीदों का दीया जल गया है। उन्हें लगता है कि अब सन्नाटा जल्द ही टूटेगा। तरक्की की दीपावली से अयोध्या की रोशनी और तेज होगी।
अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद स्थल का विवाद लंबे अर्से से चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी में मंदिर निर्माण की कवायदें काफी समय से शुरू हो गईं थी। इधर, पीएम के हाथों पांच अगस्त को भूमि पूजन कार्यक्रम के एलान के बाद से तैयारियों ने तेजी पकड़ी।
पिछले एक हफ्ते से फैजाबाद-अयोध्या मार्ग समेत रामजन्मभूमि स्थल, हनुमानगढ़ी, सरयू तट को सजाने संवारने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा था। साफ-सफाई से लेकर भवनों व प्रतिष्ठान भवनों का पीले रंग से रंगरोगन किया जा रहा था। सुरक्षा के लिहाज से इस मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाई जा रही थी। साथ ही समूचे मार्ग की फूलों से सजावट की जा रही थी। इससे कारोबार प्रभावित हुआ।
बुधवार को इस मार्ग पर प्रतिष्ठान बंद रहे। लोग घरों में कैद हो गए। आधा पहर तक इस मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा। चारों ओर पुलिस जवान ही नजर आ रहे थे। भूमिपूजन के अगले दिन यानी गुरुवार को इस मार्ग पर पसरा सन्नाटा टूटा, लोगों की चहलकदमी दिखी। लोग फिर अपने पुराने कामों में मशगूल दिखे। कारोबारी अपने विभिन्न प्रतिष्ठानों के शटर खोले और सामान सजाकर ग्राहकों के आने के इंतजार में बैठ गए थे।
दुकानों पर इक्का-दुक्का ही ग्राहक नजर आए। अमर उजाला ने व्यापारियों से बातचीत की। सभी बोले, सदियों से चल रही बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने जा रही है। शुभ कार्य के लिए कारोबार प्रभावित होने का कोई मलाल नहीं है। शिलान्यास से एक आशा की किरण जगी है। उन्हें उम्मीद है कि राम मंदिर बनने से अयोध्या विकास के पथ की ओर अग्रसर होगा और तरक्की के नए संसाधन सुलभ होंगे।