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राममंदिर परिसर में त्रेतायुग को जीवंत करने की योजना

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अयोध्या-रामलला का भव्य विग्रह। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में दिव्य-भव्य मंदिर निर्माण की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। मंदिर परिसर में तीन एकड़ भूमि का समतलीकरण का कार्य किया जा चुका है। अब मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए भूमि पूजन का इंतजार है। वहीं राममंदिर परिसर में 70 एकड़ भूमि पर रामायण कालीन दृश्य निर्मित कराने की तैयारी है।
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मंदिर परिसर में प्रवेश करने के साथ ही भगवान श्रीराम के समय की पौराणिकता का एहसास हो, इसके लिए ट्रस्ट ने पूरी भूमि का सर्वे कर अति ऐतिहासिक और प्राचीन संदर्भ को प्रदर्शित करने वाले 11 स्थान चिह्नित किए हैं। इसका ब्लूप्रिंट ट्रस्ट ने बनाकर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को भेज दिया है।
रामजन्मभूमि परिसर में त्रेता युग की अयोध्या को पुनर्जीवित करने की योजना श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बनाई है। 70 एकड़ में विस्तृत श्रीराम जन्मभूमि परिसर में रामलला की जन्मभूमि के अलावा अनेक त्रेतायुगीन अनेक धरोहर हैं। इनकी पुष्टि जीर्ण-शीर्ण टीलों के साथ उस शिलालेख से होती है, जिसे सन 1902 में एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा की ओर से लगवाया गया था।
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अयोध्या की पौराणिकता विवेचित करते रुद्रयामल, स्कंदपुराण एवं विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों के वर्णन और विशद स्थलीय शोध के आधार पर विवेचनी सभा ने रामनगरी की 84 कोसी परिधि में जो 148 शिलालेख लगवाए, उनमें से 43 अकेले रामकोट क्षेत्र में थे।
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में कुबेर टीला के अलावा भगवान राम की लंका विजय में अहम भूमिका निभाने वाले वानर वीर नल एवं नील का टीला भी संरक्षित है। एक अन्य वानर वीर गवाक्ष, जिनकी स्मृति चुनिंदा शास्त्रों तक सिमट कर रह गयी है, उनकी विरासत यहां गवाक्ष के नाम से लगे शिलालेख से जीवंत होती है। विवेचनी सभा ने रामजन्मभूमि अथवा माता कौशल्या के भवन के ही बगल राजा दशरथ की दूसरी रानी के नाम का सुमित्रा भवन भी चिह्नित किया था।
मंदिर ट्रस्ट ने कराया पूरी भूमि का सर्वे
रामलला के गर्भगृह सहित पूरे 70 एकड़ भूमि में कई ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल मौजूद हैं। श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जन श्रुतियों के आधार पर विशेषज्ञों की ओर से पूरी भूमि का इंटरनल सर्वे मंदिर ट्रस्ट ने कराया है। रिपोर्ट में भगवान राम के युग के साक्ष्य परिसर में होने की बात कही गई है। परिसर की ऐतिहासिक चीजों में बदलाव न हो इसलिए पूरे परिसर की खुदाई नहीं की जाएगी। इसीलिए अभी फिलहाल केवल गर्भ गृह स्थल के इर्दगिर्द ही करीब तीन एकड़ जमीन का समतलीकरण किया गया है।
विभिन्न डिजाइनों, ले-आउटों को देख रहा ट्रस्ट
राममंदिर परिसर को भव्य बनाने के लिए ट्रस्ट पूरे परिसर के लिए विभिन्न डिजाइनों और लेआउटों को देख रहा है, जिनमें पार्किंग, तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाएं, परिक्रमा की व्यवस्था, किचन, गौशाला, म्युजियम, प्रदर्शनी और आराम करने की जगहें भी शामिल हों। माना जा रहा है कि विहिप के मॉडल पर ही राममंदिर का निर्माण होगा। वीएचपी के राम जन्मभूमि मंदिर मॉडल को मशहूर आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने बनाया था। उन्हें वीएचपी के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल ने यह काम सौंपा था। यह मॉडल भगवान विष्णु के पसंदीदा अष्टकोणीय आकार में होगा। नागर शैली में पूर्णतया पत्थरों से बनने वाले दो मंजिला मंदिर में पांच प्रखंड होंगे।
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