अयोध्या। अस्थाई मंदिर में शिफ्टिंग के बाद रामलला का दरबार दर्शन के लिए तो खुला है लेकिन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या औसतन 30 रह गई है। सामान्य दिनों में रामलला का दर्शन करने वालों की संख्या नौ से दस हजार प्रतिदिन हुआ करती थी। इस समय केवल सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही व बातचीत दिखती है।
कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च से ही देश में लॉकडाउन है। लॉकडाउन में आम भक्तों के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने 25 मार्च की भोर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला की शिफ्टिंग की। इसके साथ ही नए स्थान पर अयोध्या नाथ के दर्शन की व्यवस्था शुरू हुई जो अब तक चल रही है। रामलला का दरबार भक्तों के लिए खुला है।
मगर, रामनगरी अयोध्या में वीरानगी है। सड़कों पर सन्नाटा है। लॉकडाउन के चलते भोर में सरयू स्नान के लिए एक-एक करके जाने वालों संतों के अलावा श्रद्धालुओं और भक्तों की संख्या न के बराबर है। रामलला का दरबार भले ही दर्शन के लिए खुला है लेकिन लॉकडाउन का प्रभाव रामलला के दर्शन पर भी पड़ा है।
सामान्य दिनों में रामलला के दर्शन करने पहुंचने वालों की संख्या प्रति घंटा लगभग एक हजार हुआ करती थी अर्थात प्रतिदिन नौ से दस हजार तक पहुंच जाती थी। चैत्र रामनवमी पर तो दर्शन करने वालों की संख्या लाख तक पहुंच जाती थी लेकिन लॉकडाउन के दौरान इस समय प्रतिदिन रामलला का दर्शन करने पहुंचने वालों की संख्या औसतन 30 रह गई है।
प्रतिदिन लगभग आठ घंटे चलने वाले दर्शन में प्रति घंटा दो से तीन श्रद्धालुओं का औसत रह गया है। यह श्रद्धालु भी परिसर के इर्द-गिर्द रहने वाले या फिर लॉकडाउन के कारण दूर दराज के यहां रह गए इक्का दुक्का लोग ही है।
लॉकडाउन के बाद परिसर में भी सन्नाटा है। सामान्य दिनों में दर्शन अवधि के दौरान परिसर से सुनाई पड़ने वाले जय श्रीराम की गूंज नदारद है। रह गई है तो केवल सुरक्षा बलों के बूटों की आवाज या फिर उनकी आपसी बातचीत की भनभनाहट। रामनगरी के साधक, श्रद्धालु, संत और सामान्य लोग बातचीत में कहते हैं कि यह आपत्ति काल है। वह लाक डाउन का पालन करते हुए रामलला से इस विप त्ति के निवारण की प्रार्थना कर रहे हैं।
श्रीराम लला का दरबार दर्शन के लिए खुला है लेकिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का औसत प्रतिदिन लगभग 30 रह गया है। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दर्शन हो रहा है। बताते हैं कि सामान्य दिनों में यह संख्या नौ से दस हजार तक पहुंच जाती थी। अयोध्या में पर्व के दौरान यह संख्या लाख के करीब तक पहुंच जाती थी।
जेपी सिंह, अपर जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था), अयोध्या