अयोध्या। राममंदिर के हक में सुप्रीम फैसले के बाद से रामलला के चढ़ावे में दो गुना इजाफा हुआ है। नौ नवंबर को आए फैसले से पहले रामलला का चढ़ावा औसतन छह लाख रुपये मासिक था, जो फैसले के बाद बढ़कर अब 12 लाख रुपये तक पहुंच गया है। रामलला का दान पात्र हर 15 दिन के अंतराल पर महीने की पांच तारीख व 20 तारीख को खुलता है। फैसला आने के बाद से अब तक आठ बार रामलला के चढ़ावे की गिनती हो चुकी है।
इस महीने की पांच तारीख को रामजन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की गिनती ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र की देखरेख में शुरू हुई। पहले नोट गिने गए। बाद में सिक्कों की गिनती शुरू हुई जो गुरुवार को पूरी नहीं हो सकी। शुक्रवार को पुन: बचे सिक्कों की गिनती की गई।
इस पखवारे में रामलला के चढ़ावे में भारी वृद्धि हुई है। बीते एक पखवारे में रामलला का चढ़ावा सात लाख तक पहुंच चुका है। चढ़ावे की राशि को स्टेट बैंक में शुक्रवार को जमा करा दिया गया। फैसला आने के बाद पहली बार 20 नवंबर को खोले गए दानपात्र से छह लाख से अधिक रुपये निकले थे जबकि दो-तीन वर्षों से इस रकम का औसत पौने तीन से सवा तीन लाख रुपये के बीच आ रहा था।
रामलला का दानपात्र फैसला आने के बाद से अब तक आठ बार खोला जा चुका है और हर बार फैसले से पूर्व के मुकाबले लगभग डेढ़ से दोगुनी तक रकम निकल रही है। 20 नवंबर के बाद पांच दिसंबर को रामलला के दानपात्र से पांच लाख रुपये निकले थे, जबकि इसके बाद के पखवारे में 3.24 लाख रुपये निकाले गए।
पांच जनवरी को जब दानपात्र खोला गया तब चढ़ावे में फिर वृद्धि दर्ज की गई और इस पखवारे में चढ़ावे की राशि छह लाख रुपये तक जा पहुंची। 20 जनवरी को दानपात्र से पांच लाख रुपये निकले, जबकि पांच फरवरी को चढ़ावे की राशि 4.89 लाख रुपये गिनी गई।
20 फरवरी को एक बार फिर चढ़ावे की राशि 6 लाख को पार कर गई। इस बार पांच मार्च को हुई गिनती में चढ़ावे की राशि में पुन: वृद्धि हुई जो जो कि सात लाख के पास पहुंच गई है। रामलला के चढ़ावे में राममंदिर फैसले के बाद से ही औसतन दो गुना वृद्धि दर्ज की जा रही है।