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नृत्य गोपाल दास समेत श्रीराम जन्मभूमि न्यास को नहीं मिली जगह

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राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को देख जय श्रीराम का जयघोष करते भक्त। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा किए जाने के बाद से ही श्रीजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के अध्यक्ष बनने की सबको पूरी उम्मीद थी, मगर उन्हें ट्रस्ट में स्थान मिलता नहीं दिखा।
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अलबत्ता भाजपा से हमेशा दूर-दूर रहने वाले व बसपा से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को ट्रस्टी बनाया जाना चौंकाने वाला साबित हुआ। अयोध्या दूसरा नाम संघ के जिला कार्यवाह करे होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. अनिल मिश्र का नाम भी दूर-दूर तक चर्चा में नहीं था। तीसरे ट्रस्टी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास का नाम पहले से तय माना जा रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसद में एलान के बाद तय माना जा रहा था कि श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास नए ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। सुबह अचानक मणिरामदास की छावनी क्षेत्र की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई। बैरियर लगाकर चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया।
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15 सदस्यीय ट्रस्ट के स्वरूप को लेकर संतों-विहिप में गहमागहमी बढ़ गई। सभी को ट्रस्ट के स्वरूप का इंतजार था, लेकिन जैसे-जैसे नाम सामने आते गए कई संतों में निराशा दिखी। हालांकि अभी संतों को उम्मीद है ट्रस्ट में 6 नामित सदस्यों में उनके नाम हो सकते हैं।
मणिरामदास छावनी पर मौजूद संत आनंद शास्त्री ने कहा कि राममंदिर के लिए लंबे समय से महंत नृत्यगोपाल दास संघर्षरत रहे हैं, उनका ट्रस्ट में स्थान होना ही चाहिए। उन्हें अध्यक्ष बनाकर उन्हीं के नेतृत्व में ही राममंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराना ही श्रेयष्कर होगा। मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि पूरी संभावना है कि महाराज जी ही ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे।
यह हो सकता नए ट्रस्ट का स्वरूप
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में कुल 15 सदस्य होने की बात सामने आई है। इसी के साथ रामलला का पक्ष सुप्रीम कोर्ट प्रस्तुत कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। ट्रस्ट में शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज, स्वामी गोविंदगिरी, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा, डॉ. कमलेश्वर चौपाल, महंत दिनेंद्र दास सदस्य हो सकते हैं। डीएम अयोध्या ट्रस्ट के संयोजक सदस्य होंगे।
ट्रस्ट में छह नामित सदस्य भी होंगे, जिन्हें बोर्ड ऑफ ट्रस्ट नामित करेगा
ट्रस्टी बने दलित कामेश्वर कर चुके हैं राममंदिर का शिलान्यास
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाए गए दलित कामेश्वर चौपाल के हाथों ही विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर का शिलान्यास नौ नवंबर 1989 को कराया था। तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, वे नहीं चाहते थे कि हिंदू विरोधी छवि बने। सरकार की अनुमति से 35 साल के दलित युवा कामेश्वर चौपाल ने विवादित परिसर के राम चबूतरा के पास नींव की पहली ईंट रखी थी। 134 साल बाद कोर्ट से आए अंतिम फैसले को लेकर अब 65 साल के हो चुके सुपौल बिहार निवासी संघ से जुड़े कामेश्वर चौपाल ने कहा था कि वो पहली ईंट रखने वाला पल जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। वह क्षण हमेशा गर्व का एहसास कराता रहता है।
डॉ अनिल मिश्रा: अंबेडकरनगर के मूल निवासी है, आपातकाल के दौरान सन 1977 में वे संघ से जुड़े। 1981 में उन्होंने बीएचएमएस की डिग्री भी हासिल की। वे स्थापित चिकित्सक होने के साथ-साथ संघ के विभिन्न पदों पर भी आसीन रहे हैं। वर्तमान में वे संघ के प्रांत कार्यवाह हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किया जाना सौभाग्य का विषय है। उन्हें रामलला की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास: जब वह 7 वर्ष के थे, तभी वैराग्य धारण कर लिया था । वर्ष 2007 में निर्मोही अखाड़ा के सरपंच भास्कर दास के निधन के बाद उन्हें निर्मोही अखाड़ा के महंत पद पर नियुक्त किया गया। इससे पहले वे अखाड़े के उपसरपंच पद पर थे। तब से फैसला आने तक वे निर्मोही अखाड़ा की ओर से अयोध्या मामले में पक्षकार रहे।
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र: अयोध्या के राजा हैं। वे 64 साल के हैं। शांत सरल और समय चरित्र वाले राजा साहब का रामनगरी की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ाव रहा है । वे वर्ष 2009 में अयोध्या लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किया जाना गौरव का विषय है, अब शीघ्र राम मंदिर का निर्माण होगा।
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