अयोध्या। मकर संक्रांति से खरमास समाप्त हो रहा है। ऐसे में अब विराजमान रामलला की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट के स्वरूप के साथ निर्माण शुरू होने की बेकरारी बढ़ गई है। अयोध्यावासी ही नहीं, समूचे विश्व में टाट में विराजमान रामलला को भव्य व दिव्य मंदिर में स्थापित होते देखने की अभिलाषा चरम पर है।
पांच सौ साल का दंश और 138 साल की मुकदमेबाजी में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद भी सरकार की ओर से ट्रस्ट में देरी को संत समाज खरमास से जोड़कर देख रहा था, मगर अब उम्मीद है कि 9 फरवरी की कोर्ट से तय डेडलाइन से काफी पहले कुछ ही दिन में सब कुछ सामने आने वाला है। शीर्ष अधिकारियों से लेकर संघ-विहिप की सक्रियता भी इशारा कर रही है कि गृह मंत्रालय अतिशीघ्र ट्रस्ट की घोषणा करने वाला है।
राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा शुभ मुहूर्त में हो, यह अयोध्या की संत-धर्माचार्यों की मांग थी। सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर को आए फैसले में केंद्र सरकार को अयोध्या एक्ट के तहत धार्मिक ट्रस्ट बनाकर विवादित भूमि 2.77 एकड़ देने का आदेश था।
एक्ट में यह भी तय था कि जिसके पक्ष में फैसला आएगा, उसे ही अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि भी दी जाए, लिहाजा केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने हाल में अयोध्या डेस्क गठित कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक राममंदिर ट्रस्ट समेत निर्माण के स्वरूप तय करने की कवायद शुरू की। अब बुधवार को खरमास समाप्त होने के साथ राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा की संभावना प्रबल हो गई है।
माना जा रहा है कि खरमास के चलते राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा में देरी हो रही थी अब शुभ घड़ियां आ रही हैं। ऐसे में कभी भी राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा की जा सकती है, जिसका सभी को इंतजार है। अयोध्या एक्ट के तहत केंद्र सरकार से ट्रस्ट घोषणा की उल्टी गिनती अब प्रारंभ हो चुकी है।
वहीं ट्रस्ट के इंतजार में बेसब्र रामनगरी के संत-धर्माचार्यों का कहना है कि माघी पूर्णिमा 10 फरवरी तक तमाम शुभ तिथियां हैं, अब देरी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि अदालत द्वारा दी गई तिथि 9 फरवरी की डेडलाइन काफी निकट है। ऐसे में इससे पहले राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा तय है। साधु-संतों का कहना है कि खरमास के समापन का इंतजार खत्म हो गया है। सरकार को अब जल्द ही ट्रस्ट की घोषणा कर देनी चाहिए।