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राममंदिर के लिए ईंट दान कर रहे भक्त

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अयोध्या के रामजन्म भूमि न्यास कार्यशाला में रखी हुई राम शिलाएं। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण को लेकर साधु-संतों की बेसब्री जहां बढ़ती जा रही है, वहीं भक्त भी राममंदिर निर्माण शुरू होने की उम्मीद से उत्साहित हैं। सबको बस राममंदिर ट्रस्ट का इंतजार है, क्योंकि ट्रस्ट गठन होने के बाद ही राममंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
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उधर, विगत दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान के बाद विहिप की कार्यशाला में भक्तों द्वारा ईंट दान करना शुरू कर दिया गया है। दान में मिलीं ईंटें रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में भेजी जा रही हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राममंदिर निर्माण के लिए एक सभा में रामभक्तों से मंदिर निर्माण में सहयोग के रूप में 11 रुपये व एक शिला दान देने का आह्वान किया था जिसके बाद देशभर से रामभक्त ईंट लेकर अयोध्या पहुंच रहे हैं।
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अब तक सैकड़ों की संख्या में ईंटें दान स्वरूप अयोध्या पहुंच चुकी हैं। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि नौ नवंबर को कोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झारखंड की एक रैली के दौरान रामभक्तों से आह्वान किया था कि रामशिलाएं और 11 रुपये दान स्वरूप लेकर अयोध्या जाएं।
इस आह्वान के बाद अब तक सैकड़ों की संख्या में ईंटों का दान किया जा चुका है। कहते हैं कि ये ईंटें भक्तों की भावनाओं का प्रकटीकरण हैं। हालांकि शरद शर्मा कहते हैं कि राममंदिर निर्माण के लिए ईंटों की नहीं बल्कि पत्थर दान की जरूरत है। लेकिन दान की गई ईंटों में भक्तों की भावनाएं जुड़ी हैं इसलिए इनको रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में सहेजा जा रहा है।
धरोहर के रूप में सुरक्षित हैं दो लाख रामशिलाएं
शरद शर्मा बताते हैं कि प्रारंभिक दौर में राममंदिर आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए विहिप के नेतृत्व में संतों के सहयोग से 1987 से 89 के बीच पूरे देश में रामशिला पूजन का अभियान शुरू हुआ। देश के गांव-गांव में रामशिलाओं का पूजन हुआ। शिलापूजन में एकत्र हुई पौने तीन लाख से अधिक शिलाओं में से दो लाख के करीब ईंटें अब भी मंदिर निर्माण की धरोहर के रूप में सहेजकर राममंदिर कार्यशाला रामघाट में रखी गई हैं।
कुछ ईंटें तो शिलापूजन मुहिम के तत्काल बाद 1989 में मंदिर निर्माण के लिए हुए शिलान्यास में प्रयोग की गईं। जबकि 1992 में विवादित स्थल के करीब समतलीकरण के बाद निर्मित चबूतरे में भी 50 हजार से अधिक पूजित शिलाएं प्रयुक्त हुईं। शुरूआती दौरे में इन शिलाओं को फकीरे राम मंदिर में रखा गया था। करीब डेढ़ दशक पूर्व इन शिलाओं को राममंदिर कार्यशाला में लाकर रखा गया है।
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