डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय जल्द ही गर्भ संस्कार पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से अयोध्या में सदियों पुरानी गुरुकुल विद्या को एक बार फिर से जीवित करने का प्रयास किया जाएगा, जिसके बारे में हमें सुनकर या पढ़कर आसानी से यकीन नहीं होता है। दावा है कि अगर यह प्रयोग सफल हो गया तो हम बच्चे को गर्भ में ही संस्कार के साथ शिक्षा भी दे सकेंगे। इस प्रकार के पाठ्यक्रम व कार्यक्रम चलाए जाने की सलाह बीते दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दी थी।
पाठ्यक्रम में तीन सैद्धांतिक प्रश्न पत्र और एक प्रयोगात्मक प्रश्नपत्र होंगे। प्रथम प्रश्न पत्र में वैदिक योगिक ग्रंथों में वर्णित मानवीय मूल्यों, सद्गुणों, भारत के प्राचीन एवं आधुनिक विभूतियों योगियों, संत शहीद सुधारकों वैज्ञानिकों आदि तथा महान नारियों के प्रेरणा प्रद प्रसंगों को शामिल किया जा रहा है। द्वितीय प्रश्न पत्र में आवश्यक विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों जैसे योग आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा आदि का परिचय एवं इनमें वर्णित सगर्भा स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण उपचार के सुझाव दिए जाएंगे।
इस संबंध में राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि इसके लिए गर्भ संस्कार का ज्ञान माता और पिता दोनों को होना चाहिए। गर्भ धारण करने के समय का दिन, समय से लेकर वातावरण, नक्षत्र और महिला पुरुष की मनोदशा अनुकूल होनी चाहिए। गर्भधारण करने के बाद जिस तरह के बच्चे की कामना हो, उसी के अनुसार मां को आचरण करना चाहिए और उसी माहौल और वातावरण में रहना चाहिए। अगर यूनिवर्सिटी के इस प्रयोग और प्रक्रिया से आचार व्यवहार, संस्कार और इच्छित गुणों वाली मनचाही संतान की मुराद पूरी हुई तो भारत एक बार फिर से धर्मगुरु का तमगा हासिल कर लेगा।