अयोध्या। रामनगरी के कुछ मंदिरों में सोमवार की देर रात्रि कुंवर कलेवा का महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। चक्रवर्ती महाराज दशरथ का महल बड़ास्थान में कुंवर कलेवा महोत्सव की अनुपम छटा देखते ही बन रही थी।
संत-साधक अपने ही आराध्य को मधुर गालियों की बौछार कर रहे थे जिसकी वे नित पूजा-अर्चना, वंदना करते हैं। दशरथ महल में कुंवर कलेवा महोत्सव में आस्था चरम पर दिखी तो मंदिर के पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देंवेद्रप्रसादाचार्य भी अन्य संतों के साथ महोत्सव में पगे नजर आए।
दशरथमहल में दूलह श्रीरघुनाथ बने, दुलही सिया सुंदर मंदिर माही... बरनत छवि जहं तहं सब लोगू, अवसि देखिअहि देखन जोगू... बता दा बबुआ, लोगवा देत काही गारी...आदि गीतों से माहौल भक्तिमय था। वहीं मानसकार गोस्वामी तुलसी दास की भावना के अनुरूप ही संत-महंत भी श्पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बाराती... का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनों का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे।
बिंदुगाद्याचार्य के शिष्य संत रामभूषण दास ने कलेवा की रस्म निभाई। कुंवर कलेवा महोत्सव के बाद जानकी जी विदा होकर जब अयोध्या पहुंचती हैं तो वहां भी संतों द्वारा उन्हें छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इस दौरान आचार्य प्रणीत पदों का गायन भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना।
इस दौरान महंत रामकुमार दास, महंत नागा हरिदास, महंत रामशंकर दास रामायणी, कथाव्यास मधुसूदनाचार्य, पंडित विष्णुप्रसाद नायक शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य मौजूद रहे। उधर, जनकनंदिनी का मायका माने जाने वाले जानकी महल में भी देर रात्रि कुंवर कलेवा का आयोजन किया गया।