अयोध्या। प्राचीन काल में संतों ने भगवान को गर्मी से बचाने के लिए फूलबंग्ला सजाने की जो परंपरा शुरू की थी, वह आज भी प्रवाहमान है। प्राचीन पीठ अशर्फी भवन में संचालित श्रीरामकथा महोत्सव के क्रम में शनिवार देर रात मंदिर में विराजमान लक्ष्मीनारायण की फूल बंग्ला झांकी सजाई गई।
कथा महोत्सव में श्रीराम विवाह के दौरान भगवान का भव्य शृंगार मोगरा, गुलाब व कमल के पुष्पों से किया गया। इससे पूर्व भगवान का कमल, गुलाब व तुलसीदल से सहस्त्र अर्चन भी किया गया। अशर्फी भवन के पीठाधीश्वर जगद्गुरू श्रीधराचार्य ने जैसे ही श्रीराम विवाह का प्रसंग सुनाया तो चारों तरफ आओ सखियों मिल गाओ बधाई राम की बरात जनकपुर आई...गूंजने लगा। श्रीधराचार्य ने कहा कि राम जी का विवाह संपन्नता का प्रतीक है और भगवान शिव का विवाह सादगी का प्रतीक है। कथा स्थल पर श्रीराम विवाह की सजीव झांकी भी सजाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न प्रांतों से आए भक्तों की भीड़ रही।
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श्रीकृष्ण की हर लीला बनाती है संस्कारवान : स्वर्णदीप
हनुमतनगर (अयोध्या)। पूरा ब्लॉक क्षेत्र के दुर्गापुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन कथा व्यास स्वर्णदीप शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला संस्कारवान बनाती है। कथा व्यास ने कहा कि इंद्रदेव की पूजा न होने से इंद्रदेव नाराज हो गए और बारिश नहीं की। गोकुलवासियों ने श्रीकृष्ण के साथ जाकर गिरिराज शरण की पूजा की। उन्हें 56 भोग लगाए, तब गिरिराज भगवान ने प्रसन्न होकर बारिश की। कथा अवसर पर मुख्य यजमान चंद्रभान तिवारी, विमल तिवारी ने भी गिरिराज भगवान की पूजा कर 56 भोग अर्पित किया। संवाद