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राममंदिर निर्माण में चंपत राय की तय होगी अहम भूमिका

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धीरेंद्र सिंह
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के महायज्ञ में जल्द ही घर-घर से आहुति पड़ती दिखेगी। इसकी कार्ययोजना से लेकर कार्यान्वयन तक का जिम्मा नब्बे के दशक की कारसेवा के सफल संचालन का अनुभव रखने वाले विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय को मिलने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख ट्रस्टियों ने उनका नाम मुख्य रणनीतिकार व कुबेर की भूमिका के लिए सुझाया है। ट्रस्ट की पहली बैठक में 19 फरवरी को इसका एलान तय माना जा रहा है। यहां से सोमवार को विदा लेने से पहले श्री राय ने भी नई जिम्मेदारी का खास लोगों को एहसास करा दिया है।
कारसेवा के 30 साल बाद देशभर में साधु-संतों की नई टोली समेत बजरंग दल व दुर्गा वाहिनी जैसे युवा विंग को सक्रिय करने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने राममंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से नए ट्रस्ट का बुधवार को पंजीकरण कराकर गृह मंत्रालय के अवर सचिव खेला राम मुर्मू के जरिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरन को स्थानांतरित किया था।
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15 सदस्यीय ट्रस्ट के स्थायी नौ सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट में रामलला का केस लड़ने वाले वकील के. परासरन, 1989 में राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित सदस्य कामेश्वर चौपाल, प्रयागराज में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, पेजावर मठ, उडुपी, कर्नाटक के पीठाधीश्वर जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख युगपुरुष परमानंद, पुणे के स्वामी गोविंद देव गिरि, अयोध्या राज परिवार के बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, आरएसएस के अवध प्रांत कार्यवाह डॉ. अनिल मिश्र, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि महंत दिनेंद्र दास को सरकार ने चुना।
ट्रस्ट बनने के बाद अब सरकार को संत-धर्माचार्यों समेत संघ व विहिप के जिम्मेदार लोगों ने यह बात पहुंचाई है कि जिन नौ ट्रस्टियों के नाम हैं, उनके भरोसे राममंदिर निर्माण में सरोकार साधना मुश्किल होगा। जन-जन की भागीदारी के लिए सधी योजना व कार्यान्वयन के लिए केवल एक नाम उपयुक्त है, वह हैं विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय।
राममंदिर आंदोलन के प्रमुख शिल्पी रहे अशोक सिंहल के देहावसान के बाद यह काम सिर्फ चंपत राय के कुशल नेतृत्व में ही संभव है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक चंपत की नई भूमिका पर मंथन हो चुका है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी चंपत राय के अनुभव के जरिए मंदिर के निर्माण में विश्वभर के सभी राम भक्तों की सहभागिता सुनिश्चित करने की बात समझा चुके हैं। वह चाहे आर्थिक हो या प्रत्यक्ष।
सूत्र बतातेे हैं कि नए ट्रस्ट में चंपत राय की नेतृत्व क्षमता की जरूरत है, जिस पर अनौपचारिक मुहर लग गई है। तय हुआ है कि अयोध्या से राजस्थान तक राममंदिर के लिए पत्थर तराशी, निर्माण सामग्री समेत धनसंग्रह की हर एक कड़ी को चंपत राय ही बखूबी जानते-समझते हैं। ट्रस्ट में उनकी भागीदारी से सरोकार साधने की रणनीति जहां गांव-गांव जन-जन तक पहुंचेगी, वहीं चंदा-दान का विस्तार व प्रसार तेजी से होगा। अयोध्या आए चंपत राय ने सोमवार को विदा लेने से पहले खास सिपाहसालारों के साथ 30 साल बाद फिर से देश-विदेश में कारसेवा जैसा उत्साह व जोश का माहौल राममंदिर निर्माण के लिए तैयार करने की रणनीति पर चर्चा की।
विराट धर्मसभा के जरिए हाल में सबने देखा था कुशल प्रबंधन
विहिप नेता चंपत राय 1990 के दशक रमें कारसेवा के दौरान कुशल सांगठनिक क्षमता दिखा चुके हैं। संघ ने उन्हें इसी उद्देश्य के लिए मेरठ में बतौर संघ के विभाग प्रचारक से विहिप में इंट्री दी थी। वे 1986 में विहिप के प्रांत सह संगठन मंत्री बनाए गए थे। 1991 से 95 तक अयोध्या कार्यालय के सह केंद्रीय मंत्री भी रहे। इसके बाद केंद्रीय संयुक्त मंत्री, मंत्री, महामंत्री का उनका लंबा अनुभव राममंदिर निर्माण के लिए बहुत आवश्यक माना जा रहा है। उनकी क्षमता को अयोध्या में 25 नवंबर 2018 को आयोजित विराट धर्मसभा में पूरे विश्व ने देखा था, तब किसी को अनुमान नहीं था कि ऐसे दौर में विहिप लाखों की भीड़ जुटा सकती है।
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वर्ष प्रतिपदा से पहले विहिप का बज जाएगा बिगुल
विहिप ने पहले ही आगामी वर्ष प्रतिपदा (25 मार्च) से हनुमान जयंती (8 अप्रैल) तक चलने वाले श्री राम महोत्सव में सभी राम भक्तों का आह्वान कर चुकी है। अब राममंदिर बनाने के नए ट्रस्ट में चंपत राय के जुड़ने के साथ इस कालावधि में भारत के हर हिन्दू मंदिर, चौपाल, गांव, नगर, तहसील व जिला केंद्रों में सभी रामभक्त हिंदू एकत्र होकर भगवान श्रीराम, भगवान वाल्मीकि व श्रीराम जन्मभूमि के चित्रों के साथ हर्षोल्लास से विशाल-भव्य शोभा यात्राएं निकालने, सभाएं करने व उनमें सहयोगी व सहभागी बनने का बिगुल बज जाएगा।
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