रेलकर्मियों ने एक बार फिर सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट और नयी पेंशन स्कीम के खिलाफ मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन गुरुवार तक चलेगा। नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (एनआरएमयू) कार्यालय से चले कर्मियों-अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन पर एक छोर से दूसरे छोर तक जमकर नारेबाजी की।
यूनियन के मंडलीय अध्यक्ष आरजे कनौजिया, शाखाध्यक्ष सुदर्शन सिंह और मंत्री हीरालाल के नेतृत्व में प्लेटफार्म पर सभा हुई। सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट व नई पेंशन नीति की खामियों पर वक्ताओं ने जमकर भड़ास निकाली।
पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने और नई को रिजेक्ट करने के नारे लगे। शाखा अध्यक्ष सुदर्शन सिंह ने रिपोर्ट के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए कहा कि रिपोर्ट बीते 19 नवंबर को एके माथुर द्वारा सौंपी गयी है।
इसमें रेलकर्मियों के लिए जो मांगें रखी थीं, वह आशा के प्रतिकूल है। न्यूनतम वेतन 26 हजार के स्थान 18 हजार रखा गया है। रिपोर्ट में रेलवे के निम्न वेतनभोगी कर्मियों की उपेक्षा और उच्चतर वेतन भोगियों को लाभ पहुंचाकर इनके वेतनों में जमीन-आसमान का फर्क किया गया है।
एनआरएमयू के मंडल अध्यक्ष आरजे कनौजिया का कहना था कि अब तक की तीन हड़तालों से शायद रेलवे ने सबक नहीं लिया है। एक बार फिर देशव्यापी हड़ताल को मजबूर किया जा रहा है। रेल कर्मियों की मांगें पूरी न हुईं तो स्ट्राइक होगी व रेल का पहिया जाम होगा।
आगामी 25 जनवरी से 10 फरवरी तक पूरे भारत में जनमानस को जागरूक किया जायेगा। 11-12 फरवरी को हड़ताल के पक्ष में रेलकर्मियों से पत्रक लिया जायेगा। फैसला पक्ष में आया तो मार्च के प्रथम सप्ताह में किसी भी समय हड़ताल पर जाने की नोटिस दिया जाएगा।
शाखा मंत्री हीरालाल का कहना था कि वेतन वृद्धि पांच फीसदी के बजाय तीन फीसदी की गई है। महिला कर्मियों की दो वर्ष की चाइल्ड केयर लीव में दूसरे साल में केवल 80 फीसदी वेतन भुगतान को मान्य किया गया है, यह स्वीकार नहीं है।
प्रदर्शन में अयोध्या के एसएस जीपी सिंह, सीडीओ बीपी मिश्र, वीबी सिंह, डीके सिंह, फूलचंद्र, संजीव कुमार, प्रवीण मिश्र, मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक विंध्याचल सिंह, एआरटी प्रभारी डीके त्रिपाठी, इंजीनियर ऋतुरंजन भारती आदि ने भाग लिया।