दो दिन कड़ाके की ठंड के बाद हल्की बरसात फसलों के लिए संजीवनी बन गई है। बरसात से किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आई है। अभी तक लगभग साढ़े तीन मिमी. बारिश हुई है। किसानों की माने तो थोड़ी बरसात और हो जाए तो बेहतर होगा। इस बरसात से सरसों-मटर को छोड़ सभी फसलों को फायदा हुआ है।
जनवरी का महीना कड़ाके की ठंड के लिए जाना जाता है। जनवरी के दूसरे पखवारे में ठंड ने वापसी की। सोमवार को बदली छाई तो मंगलवार सुबह बूंदाबांदी शुरू हो गई। दोपहर तक साढ़े तीन मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई।
बरसात से किसानों को एक सिंचाई से मुक्ति मिल गई। कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा के प्रशिक्षण संयोजक व हार्टीकल्चर विश्ेाषज्ञ डॉ. मिथलेश पांडेय ने बताया कि इस बरसात से उन्हीं फसलों को नुकसान हुआ है, जिनमें फूल आ रहे हैं।
डॉ. पांडेय की माने तो सरसों और मटर की वह फसल जिसमें फूल आ रहा है इन्हीं दो फसलों को थोड़ा नुकसान हो सकता है। हालांकि बरसात के दौरान हवाएं तेज गति से नहीं चल रही थी, इसलिए फसल को नुकसान होने की आशंका कम ही है।
डा. पांडेय ने बताया कि फसलों की हल्की सिंचाई हो गई है। थोड़ी बरसात और हो तो फसलों के लिए और अच्छा होगा। उप निदेशक कृषि टीपी चौधरी ने बताया कि ठंडक की वापसी और बरसात से गेहूं की फसल के लिए पूरी तरह से अनुकूल हो गया है।
इस बरसात से गेहूं, चना, मसूर आलू, अरहर की फसल के लिए यह बरसात वरदान साबित होगी। उन्होंने बताया कि 96 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल पर गेहूं की फसल आच्छादित है। इतने बरसात से फसल की पूरी सिंचाई नहीं हो सकती है। थोड़ा और बरसात होगी तो किसानों के लिए और बेहतर होगा।