सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते बैंक कर्मी।
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अयोध्या। केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों व सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण व बंदी के विरोध में देश के 10 केंद्रीय श्रम संगठनों द्वारा किए हड़ताल के आह्वान का असर जिले में सिर्फ बैंकों की बंदी तक दिखा।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन ने दावा किया कि जिले के सभी राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे। आल इंडिया इश्योरेंस इंपलाइज यूनियन भी हड़ताल में शामिल रही। हालांकि, निजी बैंकों ने इस हड़ताल से दूरी बनाए रखी। वहीं, बैंककर्मियों ने सभा कर विरोध जताया तो वामपंथी दलों ने सभा करके नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों व सार्वजनिक संस्थानों के निजी करण बंदी के विरोध में 10 केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर बुधवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया था। ये हड़ताल सिर्फ बैंक तक ही सीमित रही। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन ने दावा किया कि जिले के सभी राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे और सभी बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे।
इस दौरान बैंक कर्मियों की एक सभा सिविल लाइन स्थित सेंट्रल बैंक की शाखा पर हुई, जिसमें बैंककर्मियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। सभा को संबोधित करते हुए सेंट्रल बैंक इंप्लाइज यूनियन के प्रांतीय महामंत्री केके रस्तोगी ने कामगारों के राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित 12 सूत्रीय मांग पत्र पर प्रकाश डालते हुए बैंकिंग उद्योग में लंबित वेतन समझौता और पेंशन सुधार शीघ्र किए जाने की मांग की।
सेंट्रल बैंक रिटायर्ड ऑफिसर्स एसोसिएशन के एसपी चौबे ने मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों की निंदा की। सभा में यूटीबीईयू के सचिव विकास शर्मा ने नई पीढ़ी के बैंक कर्मियों को संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा। हड़ताल की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 21 हजार व न्यूनतम पेंशन 10 हजार करने, ग्रामीण मजदूरों को रोजगार गारंटी कानून व ठेका प्रथा समाप्त कर सभी खाली जगहों पर भर्ती प्रारंभ करना रहा।