अयोध्या। शारदा सहायक नहर कटने से जलमग्न हुए आधा दर्जन से अधिक गांवों की हाल बदतर है। घरों में घुसे पानी से दर्जन भर से अधिक घरों में बुधवार को भी चूल्हे नहीं जले, और न ही लंच पैकेट वितरण हुआ।
लाखों की बर्बाद हुई धान, गन्ना, सब्जी की फसलों के बाद अब घरों, गलियों व सड़कों पर लगे गंदगी के अंबार से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है।
वहीं, हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहा है, इससे पीने के पानी का भी संकट खड़ा हो गया है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम गांव नहीं पहुंची हैं, इससे नाराज ग्रामीण गुस्से में विरोध जता रहे हैं।
गोपालपुर निवासी इलिताफ अली, गंगाराम जायसवाल, अनिल वर्मा, विजय वर्मा, रामसुंदर कोरी, बिंदर गुप्ता, अनंतराम, सोहनलाल, रामदेव कोरी, धूम का पुरवा निवासी मो. अमीर, सरवर खान, अकील अहमद आदि ने बताया कि गांव में अभी भी जलभराव है।
घरों, गली, चौराहों, सड़कों पर गंदगी का अंबार लग गया है, इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है इससे जहां संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
कहा कि हैंडपंप का भी पानी भी दूषित हो गया है, इससे पीने का पानी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि अभी तक गांव में कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं दिखाई पड़ा है, जबकि संक्रामक रोग का खतरा मंडरा रहा है।
गांव निवासिनी मिथिलेश वर्मा, रामावती, हंसराजी, गायत्री देवी, आशा देवी, छोटका, लक्ष्मी, मोहिनी, सुंदरा देवी ने बताया कि उनके घरों में अभी भी इतना पानी भरा हुआ है कि घर में चूल्हा नहीं जल पा रहा है। बताया कि उन्हें मंगलवार-बुधवार को भी लंच पैकेट नहीं मिला, सिर्फ एक-एक समोसा देकर समझा दिया गया।
मामले में नहर की कटान पर बंधा बनवा रहे सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता आरके निगम ने बताया कि नहर विभाग की ओर से ग्रामीणों को कोई आर्थिक मदद देने का प्रावधान नहीं है।
दैवीय आपदा कोष से जिला प्रशासन क्षतिपूर्ति का आंकलन करा कर आर्थिक सहायता मुहैया कराएगा। वहीं, नायब तहसीलदार नरसिंह नारायण वर्मा ने बताया कि पानी घटने के बाद ही क्षतिपूर्ति का आंकलन कराकर आर्थिक सहायता प्रभावित ग्रामीणों को दी जाएगी।