वकीलों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर प्रशासन विरोधी नारे लगाए। जिलाधिकारी कार्यालय से बाहर जाने के लिए पश्चिमी गेट से निकले तो, वकीलों ने वहां उनकी कार को रोक लिया।
गाड़ी घेर आगे बैठ व लेट कर प्रदर्शन करने लगे। इसकी सूचना पर आनन-फानन एसएसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिटी आरएस गौतम, अपर जिलाधिकारी नगर श्रीनिवास शर्मा, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आदि अफसरों ने भारी सुरक्षा बल के साथ पहुंचे।
वकीलों को समझाने की कोशिश और जिलाधिकारी से वार्ता को कहा गया, लेकिन संघ अध्यक्ष ने वार्ता करने से इंकार कर दिया। इसके बाद वकीलों ने निबंधन कार्यालय पहुंच वहां का कामकाज पूरी तरह से ठप करा दिया।
वकील 27 जून से वाहन स्टैंड के लिए जमीन को लेकर के लिए आंदोलित हैं। बुधावर को प्रशासन ने बार से वार्ता करने का समय दिया था लेकिन वार्ता नहीं की। वार्ता न करने से नाराज वकीलों ने गुरुवार को बार एसोसिएशन की आपात कालीन बैठक बुलाई।
बैठक में संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने वार्ता करने से इंकार कर दिया। इसके बाद प्रकरण पर अगली रणनीति पर चर्चा कराई गई। चर्चा में वकीलों ने आंदोलन को और आक्रामक बनाने का तर्क दिया। कहा कि बगैर किसी विलंब के जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाए।
तुरंत लाउडस्पीकर से घोषणा कर सभी अधिवक्ताओं को एकत्रित किया गया। वकीलों को चैंबर से निकालने के लिए सभी वादकारी शेडों व अधिवक्ता चैंबरों की बिजली काट दी गई। लगभग 15 मिनट में सभी वकील अधिवक्ता संघ भवन के सामने एकत्रित हुए।
इसके बाद वकीलों ने प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ कूच किया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच वकीलों ने कार्यालय को घेर लिया। मामले की गंभीरता भांप इसकी जानकारी एसएसपी को दी गई। एसएसपी और पुलिस के अन्य अधिकारी भारी सुरक्षा के साथ मौके पर पहुंचे।
वकीलों का आक्रोश देख जिलाधिकारी अपने कार्यालय के पश्चिमी गेट से बाहर निकल गए और उनका ड्राइवर सरकारी गाड़ी लेकर जाने लगा। इस पर वकीलों ने गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया और जिलाधिकारी तथा एसएसपी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र अन्य वकीलों के साथ डीएम की गाड़ी के सामने बैठ गए। इसकी जानकारी पर जिलाधिकरी अनिल ढ़ींगरा अपने कार्यालय वापस लौट आए।
इसके बाद वकीलों का काफिला निबंधन कार्यालय पहुंचा, वहां काम कर रहे दस्ताबेज नवीस निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों का काम बंद करवा दिया। उन्हें बाहर करके ताला जड़ दिया गया।
उधर, जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने कहा कि वकीलों से वार्ता कर मामले के समाधान का प्रयास जारी है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं होगी।