अयोध्या। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के मरीजों को लाभ मुहैया कराने के मामले में जिले में निर्मला हॉस्पिटल अव्वल है। इसके बाद चिरंजीव हॉस्पिटल दूसरे व अयोध्या आई हॉस्पिटल तीसरे स्थान पर है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में हालत काफी खराब है। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज इस मामले में सबसे फिसड्डी है।
जिले में 1,73,360 पात्रों के लिए 16 हॉस्पिटल आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत हैं। इनमें पांच सरकारी व 11 निजी अस्पताल हैं। सरकारी अस्पताल में जिला पुरुष अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदौली शामिल है।
जबकि निजी अस्पतालों में निर्मला हॉस्पिटल, चिरंजीव हॉस्पिटल, अयोध्या आई हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, जगत हॉस्पिटल, अयोध्या फेको सेंटर, सीताराम हॉस्पिटल आदि शामिल हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने में सरकारी की अपेक्षा निजी अस्पताल काफी आगे हैं। जिनमें निर्मला हॉस्पिटल अव्वल है।
योजना के तहत बीते 18 सितंबर तक 2197 मरीजों का इलाज किया गया है, जिनमें मौजूदा समय में 2140 मरीज डिस्चार्ज भी हो चुके हैं।
इनमें सरकारी अस्पताल में 189 मरीजों का इलाज हुआ है, शेष 2008 मरीजों को इलाज निजी अस्पतालों में हुआ है। जिसमें निर्मला हॉस्पिटल में सर्वाधिक 899 मरीजों का इलाज हुआ है, जिसमें से 889 का क्लेम दाखिल किया गया है, इसके सापेक्ष 601 मरीजों का भुगतान हुआ है।
दूसरे नंबर पर चिरंजीव हॉस्पिटल में 386 मरीजों का, अयोध्या आई हॉस्पिटल में 300, जगत हॉस्पिटल में 158, अयोध्या फेको सेंटर में 96, लाइफ लाइन हॉस्पिटल में 101, सद्भावना हॉस्पिटल में 42 मरीजों का इलाज हुआ है।
योजना के तहत इलाज के मामले में सरकारी अस्पताल सातवें नंबर पर है। इनमें जिला अस्पताल में सर्वाधिक 66 रोगियों का उपचार हुआ है। जबकि हाल ही में तमाम चिकित्सक व संसाधनों से लैश किए गए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में इस मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है।
यहां महज 18 मरीजों का उपचार किया गया है, जिसमें से 13 को डिस्चार्ज किया गया है। सरकारी अस्पतालों में दूसरे नंबर पर राजकीय श्रीराम हॉस्पिटल है, जहां कुल 56 मामले निपटाए गए हैं, जिनमें 50 को डिस्चार्ज किया गया है। 46 मरीजों के इलाज के साथ जिला महिला अस्पताल तीसरे स्थान पर है।
भुगतान की रफ्तार भी सुस्त
योजना के तहत इलाज कराने के बाद मिलने वाले क्लेम के भुगतान की रफ्तार भी सुस्त है। इस वजह से भी कुछ अस्पताल योजना के तहत इलाज करने में दिलचस्पी कम दिखा रहे हैं। 11 निजी अस्पतालों में हुए 2008 रोगियों के उपचार के बाद 1974 का क्लेम दाखिल किया गया है, जिसमें मात्र 1334 का भुगतान प्राप्त हुआ है, जबकि आठ को रिजेक्ट कर दिया गया। वहीं, सरकारी अस्पतालों में 189 रोगियों के सापेक्ष 166 का क्लेम दाखिल किया गया है, जिसमें 68 का भुगतान प्राप्त हुआ है और तीन मामले अस्वीकृत किए गए हैं।
बनाया है अलग वार्ड, दी जा रही बेहतर सेवाएं
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि अब तक 46 मरीजों का योजना के तहत इलाज किया गया है, जिनमें 36 को डिस्चार्ज किया गया है। आयुष्मान योजना के मरीजों के लिए एक अलग वार्ड बनाया गया है, जहां एसी सहित तमाम व्यवस्थाएं दी जा रही हैं। पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे इसका ध्यान रखा जा रहा है।
जिले में 2197 मरीजों का ऑपरेशन किया गया है। इनमें कूल्हे, पैर, हाथ, कमर आदि के बड़े ऑपरेशन भी शामिल हैं। हादसों में घायल कई मरीजों के पैर में रॉड, प्लेट आदि डाला गया है। इसमें और तेजी लाने के लिए प्रतिदिन अनेक दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है। वहीं, पात्रता सूची में शामिल लोगों का कार्ड बनवाने के लिए भी गांव-गांव भेजकर कैंप लगाया जा रहा है। बस, इसको लेकर लोगों में जागरूकता की जरूरत है।
-डॉ हरिओम श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अयोध्या