जिले में भरवाए गए तालाबोंं-पोख्ारों व खराब हैंडपंपों की तकनीकी जांच में ब्लॉकों से भेजी गई मनमानी रिपोर्ट की असलियत सामने आने लगी है। पेयजल संकट से निजात को अब तक 500 से ज्यादा हैंडपंपों को दुरुस्त कर देने के दावे की जांच में जहां फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है।
वहीं ब्लॉकों से लेकर ग्राम पंचायतों तक भरवाए गए 613 तालाबोंं-पोख्ारों की असलियत भी गलत पाई जा रही है। पोखरों में एक बूंद पानी नहीं है, जबकि उसे भरने की रिपोर्ट दे दी गई है। अब मामले में जल निगम की टीमों को उतारकर जहां हैंडपंपों का सर्वे कराया जा रहा है, वहीं जलाशयों की फर्जी पानी भराई की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है।
जिले में सूखे के चलते तालाब और पोखरे में पानी नहीं हैं। बड़ी संख्या में हैंडपंपों के खराब होने से शहर से देहात तक पेयजल को लेकर हाहाकार की स्थिति है। आदमी तो किसी तरह प्यास बुझा ले रहा है लेकिन जानवर व पशु-पक्षी पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
हालात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के छुट्टा जानवर गांव के लोगों के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। इसी के मद्देनजर सरकारी मशीनरी को सक्रिय किया गया है। जिला प्रशासन ने पिछली 28 अप्रैल से पेयजल को लेकर कंट्रोल रूम की स्थापना की।
इसके बाद ब्लॉकों से खराब हैंडपंपों के साथ रीबोर वाले हैंडपंपों की सूचना मांगी गई लेकिन ब्लॉकों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाली रिपोर्ट भेज दी। हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए जल निगम ने तकनीकी जांच के लिए टीमें भेजनी शुरू कीं तो ब्लॉकों की रिपोर्टों की असलियत सामने आने लगी।
पूरे जिले में 1970 हैंडपंपों को रीबोर लायक बताया गया था लेकिन जल निगम के टेक्निकल सर्वे में तस्वीर कुछ अलग दिखी। तारुन में तकनीकी टीम की जांच में 106 में 50 हैंडपंप मामूली खराबी वाले मिले जबकि 56 ही रीबोर लायक पाए गए। इसी तरह बीकापुर के 110 में से 50 हैंडपंपों की तकनीकी जांच में केवल छह रीबोर लायक पाए गए।
अन्य ब्लॉकों में जांच अभी की जा रही है। मामूली खराबी वाले हैंडपंपों की ठीक कराने की जिम्मेदारी ब्लॉकों की है। अब मामले की जांच विकास विभाग कर रहा है। डीडीओ अभिराम त्रिवेदी ने बताया कि बीकापुर और तारुन के तकनीकी सर्वे में सामान्य खराबी वाले हैंडपंपों को रीबोर की श्रेणी में पाया गया है।
जिले में रीबोर के लिए कार्ययोजना पर अमल शुरू हो गया है। जिले में 630 हैंडपंपों को खराब बताया गया था। इनमें 457 को चालू करा दिया गया है। खराब नलकूपों को दुरुस्त कराने के लिए 22 टीमें उतारी गई हैं।
जिले के तालाब और पोखरों को मिलाकर 613 को भरवाने का दावा है। खराब 93 नलकूपों में से कुछ को ठीक कराने की जानकारी दी गई है। डीडीओ ने बताया कि प्रतिदिन इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जा रही है।