इसे लेकर नगर पालिका को स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है। साथ ही नागरिकों में भी दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है।
शहर के नागरिकों को नगर पालिका से पिलाया जा रहा पानी सेहत के लिए खतरनाक पाया गया है। स्वच्छ जल की जगह दूषित पानी पिलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो इस प्रकार के पानी पीने से पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस बात का खुलासा पानी की गुणवत्ता जांच में हुआ है।
इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ने नगर पालिका को पत्र भेजकर पानी की गुणवत्ता सुधारने की सलाह दी है। शहर के विभिन्न मोहल्लों से 30 अगस्त से 5 सितंबर के बीच पानी के जो नमूने लिए गए थे उनकी जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है। संकलित नमूनों में 45 फीसदी से अधिक नमूने फेल पाए गए हैं।
अभियान के दौरान नगर क्षेत्र से 102 पानी के नमूने संकलित किए थे, जिसमें से 43 नमूने फेल पाए गए हैं। हालांकि इस दौरान अयोध्या नगर पालिका क्षेत्र महाराज इंटर कॉलेज, श्रीराम चिकित्सालय, रायगंज, गोलाघाट, मीरापुर वार्ड, रामघाट से 81 नमूने संकलित किए गए जो मानक पर खरे उतरे हैं।
पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर पालिका हर वर्ष तीन लाख रुपये का ब्लीचिंग (लिक्विड और पाउडर) खरीदती है। फिर भी जांच में दूषित पानी पाया गया है। आखिर लाखों का ब्लीचिंग कौन हजम कर जा रहा है?
एसीएमओ डॉ. छैल विहारी दुबे का कहना है कि पानी के नमूनों की जांच के बाद जो रिपोर्ट आई है वह चिंताजनक है। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर पालिका को पत्र लिखा गया है।
यदि नपा ने पानी की गुणवत्ता नहीं सुधारी तो कई संक्रामक बीमारियां तेजी से पांव पसारेंगी। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. नानक सरन ने कहा कि यदि लोगों के घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है तो इससे संक्रामक बीमारियां बढ़ेंगी। पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ेगा। शरीर से रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आएगी।