रामनगरी सभी धर्मों की उपासना स्थली है, इसे सांझी संस्कृति की विरासत यू हीं नहीं कहा जाता। यह हिंदूओं सहित जैन, बौद्घ, सिख व मुस्लिम धर्म की भी उपासना स्थली मौजूद हैं। अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि तो है ही यहां पांच जैन तीर्थंकरों ने भी जन्म लिया है।
सिख गुरूओं की स्मृति की भी साक्षी अयोध्या है। यहां रामजन्मभूमि के अतिरिक्त हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, छोटी देवकाली, स्वामी नारायण मंदिर, दिगंबर जैन मंदिर, गुरूद्वारा ब्रह्मकुंड सहित अन्य ऐसे स्थल हैं जो रामनगरी की पौराणिकता के गवाह हैं।
नेशनल डाटा बेस तैयार कर रही सरकार
केंद्र और प्रदेश सरकार अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश में जुटी है। आवासीय, यात्रा और जलपान जैसी पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को सुलभ करवाने के लिए सरकार नेशनल डेटाबेस तैयार कर रही है। प्रदेश सरकार ने अवर्गीकृत होटलों, लॉज, गेस्ट हाउसों, होमस्टे और अन्य आवासीय इकाइयों का पंजीकरण शुरू किया गया है।
अयोध्या की प्राचीनता के गवाह पौराणिक कुंडों के विकास के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। नोड अर्बन लैब को इसका प्रोजेक्ट बनाने का निर्देश दिया गया है। इस योजना के शुरुआती चरण में दशरथ कुंड, अग्नि कुंड, सीता कुंड, खुर्ज कुंड, विद्या कुंड, गणेश कुंड, हनुमान कुंड का प्रस्ताव बनाया गया है।
अयोध्या को पयर्टन की दृष्टि से दिव्य व भव्य बनाने के लिए पावन पथ योजना पर काम शुरू हो चुका है। इस योजना को साकार रूप देने के लिये सरकार ने एक कमेटी भी बनाई है, जो सभी तीर्थ स्थलों को जोड़कर उनका विकास ही नहीं करेगी बल्कि उसे पर्यटन के क्षेत्र में सुविधाजनक भी बनाएगी। पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को सुलभ करवाने के लिए सरकार नेशनल डेटाबेस भी तैयार कर रही है। - आरपी यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी