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रामनगरी में बहुउद्देशीय पार्किंग निर्माण ठप

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पार्किंग का रुका निर्माण कार्य। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामायण सर्किट में अयोध्या में हाईवे के निकट 16 करोड़ से निर्माणाधीन बहुउद्देशीय पार्किंग पर एक बार फिर ग्रहण लग गया है। पहले से चल रहे भूमि विवाद में कोर्ट ने स्टे दे दिया है, जिसके चलते कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को फिलहाल काम रोकना पड़ा है। बहुउद्देशीय पार्किंग का काम मार्च 2020 तक पूरा हो जाना था लेकिन भूमि विवाद के चलते यह योजना बाधित हो गई है।
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इसका निर्माण केंद्र की स्वदेश दर्शन योजना के तहत हो रहा है। राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हाईवे के निकट बहुउद्देशीय पार्किंग का निर्माण रामायण सर्किट योजना के तहत किया जा रहा था। इसकी क्षमता दौ सौ वाहनों की है। इसके निर्माण में केंद्र की स्वदेश दर्शन योजना से पर्यटन विभाग 16 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।
अब भूमि विवाद में रोक के कारण पार्किंग निर्माण ठप हो गया है। पार्किंग स्थल के लिए पर्यटन विभाग ने ग्राम मांझा मीरापुर दोआबा में जमीन खरीदी थी लेकिन गाटा संख्या 155 व 156 की काश्तकार आकृति माखेजा पत्नी भरत माखेजा ने सहायक अभिलेख अधिकारी के न्यायालय में आपत्ति दाखिल कर दी थी। एआरओ ने सुनवाई करते हुए आपत्तिकर्ता की शिकायत को प्रथम दृष्टया सही माना और आंशिक नामांतरण का आदेश दिया।
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बावजूद इसके पर्यटन विभाग ने निर्माण शुरू करा दिया। अंतत: आकृति ने कोर्ट की शरण ली। न्यायालय ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश दे दिया है। बताते चलें कि पहले बिड़ला धर्मशाला के सामने पुराने बस अड्डे परिसर में पार्किंग निर्माण होना था। यह प्रस्ताव स्वीकृत भी हो गया और कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को धन आवंटन भी कर दिया गया था। लेकिन पुराने बस अड्डे के समीप पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित सुग्रीव टीला होने के कारण एएसआई से क्लीयरेंस नहीं मिली। इस कारण पार्किंग योजना को हाईवे के निकट स्थानांतरित कर दिया गया।
यात्री सूचना केंद्र योजना अधर में
पर्यटन विकास के कार्यों में कई काम अभी तक जमीन न मिलने के कारण फंसे हैं। विकास कार्यों के अंतर्गत रेलवे स्टेशन पर 5 करोड़ से बनने वाले यात्री सूचना केंद्र योजना भी अधर में लटक गई है। इस योजना के लिए अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है जिसके चलते दो साल बाद भी इस योजना पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सकता है। इसी तरह करीब 14 स्थानों पर वाच टॉवर लगाने की योजना भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। कई स्थानों पर वाच टावर का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन कई स्थल अभी तक नहीं मिल सके हैं, जिससे काम शुरू नहीं हो पाया है।
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