शनिवार की देर शाम तक चले पूजा पाठ के बाद शहर के सभी देवी पंडालों के कपाट भक्तों के लिए खुल गये। भक्ति गीतों से पूरा शहर गूंज उठा। गली और मोहल्ले रोशन हो उठे। सप्तमी को शहर के करीब पौने दो सौ पंडालों के कपट खुलने के साथ जिले में करीब साढ़े तेरह सौ दुर्गा पंडालों और मंदिरों में पूजा-पाठ और दर्शन का दौर शुरू हो गया।
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि के स्वरूप की पूजा के साथ धुंधलका हुआ तो पंडाल और मंदिर जगमग हो उठे। शहर व गांव के भक्तों के कदम दुर्गा पूजा पंडालों की ओर बढ़ गये। हाल यह रहा कि रात नौ बजे चौक से नाका, चौक से रिकाबगंज, फतेहगंज से देवकाली और चौक से अमानीगंज मार्ग पर लोगों की भीड़ ही चलती रही। इन मार्गों पर वाहनों का चलना पूरी तरह ठप रहा।
सप्तमी पर दुर्गा पंडालों और मंदिरों में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ मां कालरात्रि की पूजा हुई। भक्ति के साथ कलाकारी का नायाब नमूना देखने के लिए पंडालों में शाम को जनसैलाब दिखा। भक्तों ने मां को नारियल-चुनरी चढ़ाकर मनोकामना पूरी होने की कामना की। भक्ति गीतों व घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से समूचा वातावरण भक्तिमय दिखा।
सड़कों पर दर्शकों के रेले के साथ मेला भी लगा रहा। बात चाहे नाका चुंगी पर स्थापित दुर्गा प्रतिमा व पांडाल की हो अथवा चौक, गणेशनगर मकबरा, राम जानकी मंदिर फतेहगंज, रिकाबगंज .... आदि का। हर कहीं प्रतिमा, झांकी के साथ पंडाल आदि के निर्माण में एक-दूसरे से होड़ रही। कहीं पारदर्शी मूर्ति बनवाई गई तो कहीं पंडाल का लुक चर्चित मंदिरों की तरह दिया गया।
रिकाबगंज में रजत जयंती वर्ष मना रही मां जगतारिणी समिति की ओर से इस बार भी भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। शाम होने के बाद भक्तों के आने का दौर शुरू हुआ तो यह सिलसिला देर रात तक चला। रामजानकी मंदिर, नाका, चौक, नाका हनुमानगढ़ी, रामजानकी मंदिर, मकबरा गणेश नगर के पंडालों पर दर्शन के लिए लंबी लाइन मध्यरात्रि तक लगी रही।