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एक-एक शिक्षामित्र के सहारे नगर क्षेत्र के 26 स्कूल

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अयोध्या। नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों के दो मामले सिर्फ बानगी भर हैं। इसी तरह यहां के 56 में से 26 विद्यालय एकल शिक्षामित्रों के सहारे ही संचालित हैं। जहां इनके लिए न तो शिक्षक-छात्र अनुपात का कोई मानक है न ही इनके प्रति कोई सहानुभूति।
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यहां तक इमरजेंसी में अवकाश लेने के लिए भी शिक्षामित्रों को नाकों चने चबाने पड़ते हैं। लिखापढ़ी के लिए यहां पर शिक्षकों को चार्ज दिया गया है, शेष व्यवस्थाएं इन्हीं के भरोसे हैं।
नगर क्षेत्र में 43 प्राथमिक व 13 जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं। यहां मौजूदा समय में 2424 बच्चे पंजीकृत हैं। मानक के अनुसार एक जूनियर हाईस्कूल में अमूमन तीन अध्यापक व प्राथमिक विद्यालय में दो अध्यापक होने चाहिए। इसके अलावा प्रति तीस छात्र एक अध्यापक की तैनाती का मानक निर्धारित है। लेकिन यह पूरा नहीं होता।
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150 छात्र संख्या से कम वाले स्कूलों में प्रधानाध्यापकों का पद समाप्त होने बावजूद भी यहां राहत नहीं मिल पा रही है। यदि प्रति तीस छात्र पर एक शिक्षक का मानक ही लिया जाय तो भी करीब 80 शिक्षकों की आवश्यकता है, जिसके सापेक्ष 27 की तैनाती है।
सपा सरकार में शिक्षामित्रों का समायोजन होने के बाद व्यवस्था पटरी पर आ गई, लेकिन उनका समायोजन निरस्त होते ही पुन: व्यवस्था बदहाल हो गई। हालात यह है कि शिक्षामित्रों को मानदेय तो दस हजार दिया जा रहा है लेकिन 26 स्कूलों का संचालन इन्हीं के सहारे है।
यहां स्कूल का ताला खोलने, साफ-सफाई, नामांकन, उपस्थिति, शिक्षण कार्य, एमडीएम आदि इन्हीं के भरोसे है। बस, कागजी कार्रवाई के लिए एक-एक शिक्षक को दो से तीन स्कूलों का चार्ज दिया गया है, जिनका पूरा समय इधर-उधर आने-जाने में ही व्यतीत हो जाता है।
अमर उजाला टीम ने गुरुवार को इन स्कूलों का जायजा लिया तो शिक्षामित्रों ने दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि नियमानुसार अवकाश लेने के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ता है। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गेश मिश्र ने बताया कि सरकार अपने वादे से मुकर रही है। कार्य व जिम्मेदारी का निर्वहन शिक्षामित्र पूर्ववत कर रहे हैं, बस मानदेय में सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
-नगर क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 80 शिक्षकों की आवश्यकता है, जिसके सापेक्ष 27 की तैनाती है। शेष में शिक्षामित्र से काम चलाया जा रहा है।
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-संजय गुप्ता, नगर शिक्षा अधिकारी, अयोध्या
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