विवादित परिसर के आसपास जवान मुस्तैद रहे। सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता रही। रामलला की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बल व कमांडों भी चौकस रहे।
5 जुलाई 2005 के आतंकी हमले के बाद इस तिथि पर अतिरिक्त सतर्कता के लिए शनिवार से शुरू हुआ सुरक्षा घेरा रविवार को और चुस्त रहा। पूरी अयोध्या में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को अलर्ट किया गया था।
सरयू नदी के तट से अयोध्या के गली-कूचों तक में कांबिंग का दौर रहा। पुलिस अफसरों की टीमें घूमतीं रहीं। आतंकी खतरों की आशंका में सार्वजनिक स्थलों व होटल धर्मशालाओं पर भी पुलिस की निगरानी रही।
खुफिया के लोग भी सक्रिय रहे। अयोध्या की सीमा पर बनाए गए बैरियरों और चेक पोस्टों पर संगीनधारी तैनात रहे। बगैर पूछताछ और छानबीन के किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।
विवादित परिसर के इर्द-गिर्द सुरक्षा के खास इंतजाम थे। परिसर के प्रवेश मार्ग पर भी खासा ऐहतियात बरता जा रहा था। परिसर से दो सौ मीटर पहले से ही उधर जाने वालों से पूछताछ हो रही थी।
परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर सीआरपीएफ के 65 बटालियन के द्वितीय कमांडेंट डिप्टी कमांडेंट ने अफसरों के साथ समूचे परिसर में ड्यूटी स्थलों की चेकिंग की। हालांकि धर्मनगरी आम दिनों की तरह शांत रही।
लोगों की दिनचर्या आम रही, श्रद्धालु भी आराध्य के दर्शन-पूजन में लीन रहे। सुरक्षा के नाम पर रही सख्ती से लोगों में दस वर्ष पूर्व हुई घटना की यादें ताजा होती दिखीं। फैजाबाद शहर में भी पांच जुलाई के मद्देनजर सुरक्षा सतर्कता रही।
बस अड्डा, रिकाबगंज, चौक, नियावां, फतेहगंज, नाका आदि स्थलों पर एसपी सिटी, सीओ सिटी बम डिस्पोजल स्क्वायड व डाग स्क्वायड दस्ते के साथ वाहनों की सघन चेकिंग करवाते व भ्रमण कर जुड़वा शहरों में सुरक्षा बंदोबस्तों का जायजा लेते रहे।