शुक्रवार का दिन आंदोलन के नाम रहा। केंद्रीय और राज्य कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर हुंकार भरते रहे जबकि बैंक कर्मचारियों ने भी अपने हक-हकूक के लिए आवाज बुलंद की। हाल यह रहा कि जिन कार्यालयों और बैंकों में रोज चहल-पहल रहा करती थी, शुक्रवार को वहां पर नारेबाजी का शोर था।
बैंक में ताले लटके रहे। सौ करोड़ का बैंकिंग कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है जिससे व्यवसाइयों के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। बैंक के ग्राहक भी धन निकालने के लिए परेशान दिखे। स्टेट बैंक के अफसर और कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं रहे।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन ने देवकाली बाईपास स्थित बीओबी के सामने से मोटर साइकिल रैली। रैली रीडगंज, चौक, रिकाबगंज होते हुए सिविल लाइंस पहुंच सेंट्रल बैंक के सामने सभा स्थल में तब्दील हो गई। यूनियन के अध्यक्ष केके रस्तोगी ने कहा कि जनविरोधी नीतियों को अब हम नहीं सहेंगे।
मंत्री सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सरकार की नव उदारवादी आर्थिक नीति से कामगारों को नुकसान होगा। श्रमिक नेता एसपी चौबे ने कहा कि चंद पूंजीपतियों के इशारे पर बन रही आर्थिक नीतियों से देश की बड़ी आबादी का भला होने वाला नहीं है।
नीति ऐसी होनी चाहिए कि हर हाथ को काम मिलने की संभावना हो। विरोध प्रदर्शन में डीवी सक्सेना, राजीव, विकास, आरएस दुबे, कन्हैया, राजकुमार, सुरेश, रामगोपाल, रामप्रीत, पवन आदि मौजूद रहे।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री सुभाषचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि क्लीयरिंग हाउस लगभग पूरी तरह से हड़ताल के कारण बंद रहा जिसके कारण करीब सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
वहीं दूसरी ओर केंद्रीय कर्मचारियों के श्रमिक संघों के आह्वान पर नेशनल फोरम ऑफ बीएसएनएल वर्कर्स ने मुख्य दूरभाष केंद्र सिविल लाइंस परिसर में ताला बंदी कर 12 सूत्री मांगों के समर्थन में हड़ताल किया।
रेलवे, बीमा और रक्षा क्षेत्र में एफडीआई पर रोक लगाने, महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण लगाने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए करने, असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों को तीन हजार रुपए मासिक पेंशन देने आदि की मांग की गई। हड़ताल में प्रमुख रूप से आरजे यादव, पतिराज, रामनाथ, जियालाल, तुलसीराम आदि शामिल रहे।