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नहरों में नहीं पानी, किसान परेशान

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अयोध्या। रुदौली क्षेत्र से गुजरने वाली शारदा सहायक नहरों में पानी नहीं होने से माइनर व कुलाबे सूखे पड़े हैं। इससे रबी की फसल की बोआई प्रभावित हो रही है। पानी की कमी के कारण किसानों को निजी ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है।
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कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच गेहूं और रबी की बाकी फसलों को बोने का सही समय है। अभी तक सिंचाई विभाग की तरफ से नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे किसान परेशान हैं, उनका कहना है कि संपन्न किसान निजी साधनों से सिंचाई तो कर ले रहे हैं लेकिन छोटे काश्तकारों के सामने सिंचाई का संकट गहरा रहा है।
क्षेत्र के लखनीपुर निवासी किसान जगजीवन कुमार ने बताया कि चना व गेहूं की फसल की बोआई का समय निकलता जा रहा है। नहर में पानी आने के इंतजार में बैठे हैं। गेहूं की बोआई करनी है। पूरी फसल तैयार होने तक पांच बार सिंचाई करनी पड़ती है। सरांयपीर गांव निवासी किसान मो. इमरान कहते हैं कि अगर नहर में पानी नहीं आया तो किराए पर प्रति घंटा के हिसाब से दो सौ रुपये देकर ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ेगी। जिन फसलों की बोआई हो चुकी है अगर समय पर उनको पानी नहीं मिला तो वह बर्बाद हो जाएंगी।
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ग्राम सरांयपीर निवासी मनीराम कहते हैं कि संपन्न किसान अपने खेतों की सिंचाई निजी साधनों से कर ले रहे हैं। छोटे किसान पंपिंग सेट से सिंचाई महंगी पड़ने के कारण इस ओर कदम नहीं बढ़ा पा रहे हैं। क्षेत्र के ज्यादातर किसान खेतों की सिंचाई के लिए नहरों के भरोसे हैं। गेहूं की पहली सिंचाई का वक्त गुजरता जा रहा है। नहरों में पानी आने में हो रही देरी से किसानों का दर्द बढ़ता जा रहा है।
भेलसर निवासी किसान पप्पू लोधी बताते हैं कि कई सालों से नहरों की सिल्ट की सफाई नहीं कराई गई है। एक तरफ सरकार किसानों की आय दुगुनी करने के लिए सारी सुविधाएं मुहैया करा रही है तो दूसरी तरफ किसान सिंचाई के लिए पानी को तरस रहे हैं।
नहर विभाग बाराबंकी के एसडीओ दिनेश कुमार यादव ने बताया कि किसानों की परेशानियों को देखते हुए दस दिसंबर को शारदा सहायक नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे।
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