अयोध्या। कोरोना का असर रहा कि भक्तों के चढ़ावा को लेकर रामलला के दरबार समेत हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल समेत सभी मठ-मंदिरों में पिछले 28 साल पहले ढांचा ध्वंस के दौरान लगे कर्फ्यू से भी खराब हालात हो गए हैं। रामलला के चढ़ावे की गिनती हर माह के पांच एवं 20 तारीख को होती है। ट्रस्ट के अनुसार इस बार 5 अप्रैल को हुई गिनती में रामलला का चढ़ावा न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। मात्र 13 हजार का चढ़ावा प्राप्त हुआ है।
जबकि आम दिनों में भी रामलला के मासिक चढ़ावा ढाई से तीन लाख आता था। राम मंदिर का फैसला आने के बाद इसमें 2 गुना वृद्धि भी हुई और मासिक चढ़ावा 6 से 8 लाख तक आने लगा। लेकिन कोरोना महामारी के कारण घोषित लॉक डाउन के चलते राम भक्तों के ना आने के वजह से रामलला के चढ़ावे में भारी कमी आई है।
रामनगरी के अन्य मठ मंदिरों की व्यवस्था भक्तों पर ही निर्भर है। ऐसे में भक्तों के न आने से राम नगरी के मठ मंदिरों की भी आर्थिक व्यवस्था डांवाडोल होने को है।