अयोध्या नगर निगम को बने एक माह पूरे हो गए। मगर इस अवधि में नगर निगम कदम भर भी नहीं चल सका। प्रदेश की योगी सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी को नगर आयुक्त तक नहीं दे पाई। विकास के काम ठप हैं, जनता परेशानी महसूस करने लगी है।
प्रदेश की योगी सरकार ने मई के दूसरे सप्ताह में अयोध्या-फैजाबाद को मिलाकर नगर निगम बनाया था। अधिसूचना जारी होने के बाद दोनों नगर पालिकाओं का अस्तित्व समाप्त हो गया। प्रदेश शासन ने जिलाधिकारी को नगर निगम का प्रशासक और नगर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंप दी।
बीते एक माह के कार्यों पर नजर दौड़ाइए तो प्रगति आइने की तरह साफ दिखती है। शहर की प्रमुख सड़कों को छोड़ दिया जाए तो गलियों में कूड़े और गंदगी आसान से देखी जा सकती है जबकि इसके लिए व्यवस्था पुख्ता किए जाने की बात पहले कही गई थी। महानगर की सड़कों पर अतिक्रमण यथावत है। हाईटेक हो रहे युग में मैनुअल प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था है। नगर निगम कार्यालय के रिनोवेशन का ठेका होने के बाद अब तक काम नहीं शुरू हो पाया।
स्वच्छता और गड्ढामुक्त सड़कें योगी सरकार के शीर्ष एजेंडे पर है लेकिन इस एक माह के बीच न तो अफसरों की तैनाती हो पाई न ही सड़क को गड्ढामुक्त किए जाने के लिए टेंडर ही निगम में हो पाए हैं। नगर निगम में नगर आयुक्त के साथ एक सहायक नगर आयुक्त के बाद कुछ दिन पूर्व काम चलाने के लिए जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी को यहां के काम की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अब तक केवल ठेके के कर्मियों को एक माह का वेतन दिया जा सका है। अन्य के लिए कार्रवाई शुरू किया जाना बताया गया है। इस एक माह में केवल रूटीन के काम किसी तरह चल रहे हैं विकास कार्य का श्रीगणेश नहीं हो पाया है। शहर के रहने वाले गोपाल पांडेय, विष्णु मिश्र, राहुल गुप्ता कहते हैं कि नगर निगम की अब तक केवल घोषणा भर हुई है। किसी तरह काम नहीं हो रहा है। अब तक कुछ भी नया नहीं दिख रहा है।
अयोध्या नगर निगम की सहायक नगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी ने बताया कि रूटीन के सभी कार्य सुचारु रूप से कराए जा रहे हैं। ठेके के कर्मियों को भुगतान कराया गया, अन्य को वेतन दिए जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि नए कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए है।