डाॅ.बृजकिशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में अमर उजाला के कैंपस अड्डे में मौजूद मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं।
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पढ़े-लिखे युवाओं/युवतियों के भीतर खराब हो चुके सिस्टम के प्रति गहरा आक्रोश दिखा। उनके स्वर में बदलाव की वह छटपटाहट दिखी जो भीतर ही भीतर में उन्हें मथ रही है। बढ़ रही बेरोजगारी और उसके प्रति सियासी रहनुमाओं की कुंभकर्णी नींद से चिंता की लकीरें ज्यादातर के माथे पर साफ दिखीं।
मुद्दा उठा कि जब अशिक्षित, संवेदनहीन, आपराधिक पृष्ठभूमि के नेता सदन में बैठंेगे तो उसकी छाप तो दिखाई ही देगी। इनकी जगह पर यदि संवेदनशील और पढ़े-लिखे लोग जनप्रतिनिधि बने तो स्थितियां बेहतर होंगी। एक स्वर से कहा कि नहीं बदले नेता तो जनता मजबूर कर देगी। अब जागरूक युवा राजनीति में रुचि ले रहे हैं, गंदगी साफ होकर रहेगी।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला कैंपस अड्डा में बुधवार को राजकीय बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कालेज की छात्र/छात्राओं खुलकर विचार व्यक्त किए। कहा कि समाज से लेकर सियातत की चाहे जितनी बदरंग स्थिति हो, पर नई पीढ़ी में उम्मीदों की लौ बरकरार है।
चिकित्सा क्षेत्र की नई पीढ़ी को उम्मीद है कि बहुत कुछ तेजी के साथ बदल रहा है। यदि नेता और सिस्टम ठीक नहीं हुआ तो समय उसे खुद-ब-खुद बदल देगा। इन युवाओं की वैचारिक धार इतनी तेज है यह कहने मे बिल्कुल नहीं हिचके कि यदि नेताओं ने समय के अनुसार खुद को नहीं ढाल लिया तो जनता उसे बदल देगी।
क्योंकि युवा मतदाताओं की इतनी ज्यादा तादाद है कि उसे अब बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है। लड़कियों को सुरक्षा का भय सताता दिखा। आजादी के इतने वर्ष बीत गए लेकिन भयरहित वातावरण बनाने में सरकारें और जनप्रतिनिधि फेल रहे।
चिकित्सक के सेवाभाव को प्रमुखता से उठाते हुए कई छात्र/छात्राओं ने कहा कि मरीज के इलाज के समय जो भाव डॉक्टर का होता है, वहीं भाव जनप्रतिनिधि का भी होना चाहिए। नेताओं को मिल रही बड़ी पगार और काम नहीं करने की प्रवृत्ति पर भी युवाओं मे आक्रोश दिखा। एक युवा ने तो यहां तक कहा कि इनके काम के हिसाब से पगार हर माह फिक्स होनी चाहिए।