अयोध्या। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देश में 96 लाख उच्च शिक्षा के कॉलेज व 33 करोड़ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार हो रहा है। यह एक भारत, एक पाठ्यक्रम, सशक्त भारत, स्वच्छ भारत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। हमारा मकसद विश्व शिक्षा की रैंकिंग में आना हैं। वह डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में गुरुवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
डॉ. निशंक ने कहा कि एक प्रशासक के रूप में, भाई के रूप में, सामाजिक समसरता के रूप में भगवान श्रीराम समूचे विश्व के लिए अनुकरणीय हैं। भारत की वैभवशाली गरिमा सर्वे भवंतु सुखिन: की परंपरा पर आधारित है। यह हम सभी का दायित्व है कि इस समृद्ध संस्कृति का प्रचार प्रसार करें।
एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब हम शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध होंगे। विज्ञान एवं तकनीक पर हमें आगे बढ़ना होगा। भारत ने पूरे विश्व में योग और वसुधैव कुटुम्बकम की विचार धारा को आम जनमानस के बीच फैलाया। आवश्यकता है कि हम अपने विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों को विश्व स्तर की रैंकिंग में शामिल करने का संकल्प लें। ये नये भारत की आधारशिला होगी।
35 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति लागू करने की स्थिति में हम आगे आए हैं। यह शिक्षा संस्कारयुक्त परिणाम पर आधारित होगी। वर्तमान समय में देश में लगभग 900 से अधिक विश्वविद्यालय हैं।
आवश्यकता है शिक्षा में गुणवत्तापरक एवं परिणाम जनक सुधार की। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने राम को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए कहा कि सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत में भगवान राम के आदर्शों की परंपरा वहां के घर-घर में हैं। रामराज्य में न तो कोई वैरी था, न कोई असमानता थी।
दैहिक, दैविक और भौतिक ताप से समस्त जन समुदाय मुक्त था। डॉ. निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत स्वयं, स्वयंप्रभा, दीक्षांरभ, एनआरआर जैसे महत्वपूर्ण वेबसाइट गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं।