नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और लार्ड माउंटबेटन की साजिश से ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ाई गई। मुझे पूरा विश्वास है कि रामभवन में अज्ञातवास की जिंदगी जीने वाले गुमनामी बाबा ही नेताजी थे।
मुखर्जी आयोग को इस मामले में जांच करने का एक और मौका दिया जाए जिससे नेताजी के बारे में सच जनता के सामने आ सके। वह सोमवार को रामभवन में पत्रकारों से मुखातिब थीं।
राजश्री ने कहा कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे, क्योंकि दोनों में काफी समानता है। साधूबाबा के पास नेताजी के माता-पिता की तस्वीर, नेताजी के बड़े भाई सुरेशचंद्र बोस की रिपोर्ट, गोल फ्रेम का चश्मा मिला है।
साधूबाबा की हैंड राइटिंग भी नेताजी से मेल खाती थी। आखिर कोई साधू नेताजी से जुड़ी चीजें क्यों रखेगा। नेताजी की हवाई दुर्घटना में मौत पर उन्होंने कहा कि नेहरू और माउंटबेटन की साजिश के तहत यह अफवाह उड़ाई गई।
नेहरू ब्रिटिश शासन के प्रतिनिधि थे। नेहरू की ओर से ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली को भेजे गए पत्र पर उन्होंने कहा कि वह पत्र झूठा नहीं है। क्योंकि जीडी खोसला आयोग के सामने टाइपिस्ट श्यामलाल जैन ने शपथपत्र के साथ बयान दिया है कि नेहरू के बोलने पर हमने खुद टाइप किया है।
राजश्री ने नेताजी के विदेश में विवाह करने को खारिज करते हुए कहा कि इसे स्वीकार करना गुमनामी बाबा के प्रति अश्रद्धा होगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गवर्नर टीएन सिंह ने इस बाबत गृह मंत्रालय से जानकारी मांगी थी।
गृह मंत्रालय की ओर से गवर्नर को भेजे पत्र में लिखा था कि विदेशी लड़की से विवाह जैसा कोई रिकॉर्ड उसके पास नहीं है। यानी कि गृह मंत्रालय विदेश में नेताजी के विवाह से सहमत नहीं था।
प्रेसवार्ता के पहले राजश्री ने डीएम योगेश्वरराम मिश्र से मुलाकात कर गुमनामी बाबा के सामानों को संग्रहालय में रखने की मांग की।
राजश्री ने बताया कि डीएम ने आश्वासन दिया है कि फरवरी के पहले सप्ताह में संग्रहालय में रखने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सामानों की विशेष सुरक्षा के लिए डीएम ने पुलिस सुरक्षा का भी आश्वासन दिया है।