हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी किसान जार-जार आंसू बहाने को विवश हैं। बैंक कर्ज बढ़ता जा रहा है, साथ ही खेती के लिए बैंकों ने कर्ज देने से मुंह फेर लिया है।
कई किसान परिवारों में मुफलिसी के चलते शादी-सगाई और बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज तक प्रभावित है। केसीसी से लोन लिए किसानों का बुरा हाल है। ब्याज पानी की तरह बढ़ रहा है।
यदि चीनी मिल गन्ना मूल्य का भुगतान कर देतीं तो किसान कर्ज से मुक्त हो जाते। जबकि चीनी मिल किसानों को जो रुपया दबाये बैठी हैं और उस पर वह किसानों को कोई ब्याज भी नहीं देगीं।
परिक्षेत्र की तीन चीनी मिलों में किसानों को एक अरब 36 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। यह धनराशि चीनी मिलों के कुल भुगतान का दस फीसदी से कम होने की वजह से अभी तक इन पर किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिलाधिकारी ने इस बारे में चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है, लेकिन बात नहीं बनी।
नतीजतन जिला गन्नाधिकारी हेमराज सिंह ने परिक्षेत्र की तीनों चीनी मिलों को नोटिस भेज कर चेताया है। चीनी मिल रौजागांव में 46.18 करोंड, मसौधा में 48.92 करोड़ और चीनी मिल मिझौड़ा में 41.85 करोड़ की देनदारी है।
समय से गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने की वजह से गन्ना किसानों का खेती से मोह भंग हो रहा है। और तो और चीनी मिलें किसानों को गन्ना की खेती के लिए कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दे रही हैं।
उमरनी पिपरी निवासी कपिलदेव पाठक 20 बीघा गन्ना की बोआई की थी। मौसम खराब
होने की वजह से गन्ना तो कम पैदा हुआ था। महज 15 ट्रॉली गन्ना की सप्लाई
की थी।
अभी भी चीनी मिल पांच ट्रॉली गन्ने की कीमत अदा नहीं की है। लगभग 75
हजार रुपया फंसा हुआ है। रुपया नहीं मिलने से घर गृहस्थी का कार्य
प्रभावित हो रहा है।
चीनी मिल से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने की वजह
से केसीसी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। यदि यही हाल रही तो बैंक दोबारा
खेती के लिए कर्ज नहीं देगी।
वहीउद्दीनपुर के रहने वाले राम कृपाल मिश्र के पास 22 बीघा खेत है। नकदी
फसल होने की वजह से 15 बीघा गन्ना की खेती की। पहले बरसात नहीं होने से
गन्ने की फसल प्रभावित हुई।
अब गन्ना मूल्य भुगतान फंसने से जार-जार हैं।
कहते हैं कि खेत में महज आठ ट्रॉली गन्ना पैदा हुआ। जिसे बेचने पर महज तीन
ट्रॉली का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है।
चीनी मिल में 42 हजार रुपया फंसा
हुआ है। सोचा था गन्ना मूल्य का भुगतना होते ही अधूरा मकान का निर्माण
पूरा कर लेंगे। लेकिन दीवार खड़ी है और बारिश में परिवार भीग रहा है।
जैसे-तैसे मड़ई डाल बसर कर रहे हैं।
धन मिल जाता तो कुछ और रुपये की
व्यवस्था कर छत लदवाते। चवरढ़ार के रहने वाले रामनायक तिवारी के पास 30 बीघा खेत है। जिसमें 18
बीघा गन्ना बोया था।
गेहूं मौसम की मार से बर्बाद हो गया और गन्ना का
भुगतान फंसने से कमर टूट रही है। मिल में अभी भी 25 हजार रुपया बाकी है।
बड़ी बेटी हाई स्कूल में पढ़ रही है।
दो और बच्चे कान्वेंट स्कूल में अपनी
पढ़ाई कर रहे हैं। रुपया नहीं मिलने से बच्चों की कॉपी-किताब और फीस अभी तक
जमा नहीं हो पाया है।
जिला गन्नाधिकारी हेमराज सिंह ने कहा कि चीनी मिलों गन्ना किसानों का जो रुपया फंसा हुआ है। उसे दिलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
चीनी मिलों को नोटिस भेज कर चेतावनी दी गई है। यदि चीनी मिलें अपनी कार्य प्रणाली में सुधार नहीं किया तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।