अयोध्या। साल का अंतिम सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को लग रहा है। इस बार ग्रहण भारत में दिखाई देगा और सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य अंगूठी की तरह नजर आएगा।
वैज्ञानिक भाषा में इसे वलयाकार सूर्यग्रहण कहा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू होगा, जिसमें हर तरह के शुभ कार्यों का निषेध रहेगा। ग्रहण का राशियों पर मिला-जुला असर पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्य शिवेंद्र ने बताया कि जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आता है तब सूर्यग्रहण होता है। यह घटना केवल अमावस्या को ही घटित होती है। मूल नक्षत्र और धनुराशि पर खंडग्रास सूर्य ग्रहण एशिया, दक्षिण और भारत के अधिकांश भागों में देखा जाएगा।
भारतीय समय के अनुसार 26 दिसंबर गुरुवार को यह ग्रहण सुबह 8 बजकर एक मिनट से दोपहर एक बजकर 36 मिनट तक रहेगा। 25 दिसंबर बुधवार रात आठ बजकर एक मिनट से ग्रहण का सूतक लगेगा। उन्होंने बताया कि इस ग्रहण के समय सूर्य के साथ बुध, गुरू, शनि, चंद्र और केतु होंगे।
ग्रहण के समय मूर्ति पूजा स्पर्श वर्जित है। इस समय अपने ईंष्ट मंत्र या गुरू मंत्र का जप फलकारक होता है। आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि यह ग्रहण भारत की राजनीति को भी प्रभावित करेगा। 10 जनवरी तक सर्दी का प्रकोप भी बढ़ेगा। धनु राशि में पंचग्रही योग है, जिस कारण कोई बड़ी घटना की भी संभावना है।
25 दिसंबर की सुबह 8 बजे से बंद हो जाएंगे मठ-मंदिर
चूंकि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखेगा इसलिए सूतक माना जाएगा। जिसके चलते रामनगरी के मठ-मंदिरों के पट 12 घंटे पहले ही बंद हो जाएंगे। आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि भारतीय समय के अनुसार 25 दिसंबर बुधवार को रात्रि आठ बजकर एक मिनट से ग्रहण का सूतक लगेगा। जो ग्रहण समाप्त होने तक माना जाएगा। ऐसे में रामनगरी के मठ-मंदिरों में बुधवार की रात्रि 8 बजे के बाद व गुरुवार की सुबह भक्त अपने आराध्य का दर्शन नहीं कर पाएंगे। सूतक के चलते मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। ग्रहण के दिन गुरुवार की सुबह पहली पाली में रामलला का दर्शन भी भक्तों को सुलभ नहीं हो सकेगा।