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हनुमानगढ़ी में बजरंग बली से अनुमति लेकर ही श्रीराम जन्मभूमि जाएंगे मोदी 

Fri, 31 Jul 2020 12:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
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हनुमानगढ़ी - फोटो : अमर उजाला
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राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे सिद्ध करके ही श्रीरामजन्मभूमि में रामलला का दर्शन और भूमि पूजन के लिए आगे बढ़ेंगे। मान्यता है कि अयोध्या से स्वधाम जाते समय प्रभु राम ने हनुमानगढ़ी में राजा के रूप में विराजमान हनुमान जी का राजतिलक किया था। हनुमान जी से अनुमति लिए बिना राम के दर्शन और पूजन का लाभ नहीं मिलता। 

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बजरंगबली की प्रधान पीठ हनुमानगढ़ी के प्रति जनमानस में अगाध आस्था है। देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर रामकालीन है, इसे राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। बाद में नवाब वाजिद अली शाह ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।अयोध्या जी जो भी जाता है वह हनुमानगढ़ी का दर्शन जरूर करता है। 

रामजन्मभूमि के मुख्यद्वार पर हनुमानगढ़ी का दुर्ग है। रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम जब अयोध्या लौटे तो हनुमान जी ने यहां रहना शुरू किया। इसी कारण इसका नाम हनुमानगढ़ या हनुमान कोट पड़ा। यहीं से हनुमान जी रामकोट की रक्षा करते थे। अयोध्या के मध्य में स्थित हनुमान गढ़ी तक पहुंचने के लिए 76 सीढ़िया चढ़नी पड़ती हैं।  मंदिर लगभग तीन एकड़ में स्थापित है और करीब 150 फुट ऊंचा है।
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रुद्रयामल में वर्णित है कि राजद्वारे हनुमांस्तु वायुपुत्रो महाबल:। महावीर इति ख्यात:, सर्वलोकेषु पूजित:।। तस्य पूजा प्रकर्तव्या नरैर्नारीभिरेव च..अर्थात राजद्वार पर महा बलवान वायुपुत्र सर्वलोक से पूजित श्रीमहावीर जी हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध हैं।

उनकी पूजा यथाविधि नर-नारियों को करनी चाहिए। पुजारी राजूदास बताते हैं कि बाल्मीकि रामायण में वर्णित है कि भगवान श्रीराम जब साकेत धाम जाने लगे तो उन्होंने उससे पूर्व हनुमान जी महाराज का राजतिलक किया था। 

माता सीता ने भी उन्हें अमरता का आर्शीवाद देते हुए कहा था अजर, अमर गुन निधि सुत होऊ...।गर्भगृह में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके श्री हनुमान जी की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित है।  गर्भगृह में पीछे की ओर श्रीरामदरबार है। रामदरबार के दाहिने ओर श्री जगन्नाथ जी बगल में सालिकराम व लाल जी (श्रीकृष्ण) भगवान विराजमान हैं। इसके नीचे शनि भगवान सपरिवार रहते हैं, बगल में लक्ष्मी सालिकराम विराजमान हैं। 

हनुमान के गर्भगृह के चार द्वार हैं जो सभी चांदी के बने हैं। प्रत्येक मंगलवार तथा शनिवार को हनुमान जी के मस्तक पर सोने का मुकुट पहनाया जाता है।  श्री हनुमान जी के आसन पर क्रम से चार गदा चांदी के रखे हुए हैं। जिसका तात्पर्य है कि चारों दिशाओं की सुरक्षा से है। श्री हनुमान जी का मुख सिंदूर तथा चमेली के तेल से लाल किया हुआ है जो श्री हनुमान जी को अतिप्रिय है। गले में बड़े-बड़े फूलों का हार अति शोभायमान है।
 

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पांच बार होती है हनुमान जी की आरती 

पुजारी राजूदास बताते हैं कि हनुमान जी महाराज की पूजापद्घति के अंतर्गत हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमान जी की आरती पांच बार की जाती है। सुबह चार बजे मंगला आरती, पांच बजे श्रृंगार आरती, 12 बजे दोपहर में भोग आरती, रात्रि 9 बजे संध्या आरती और रात्रि 10 बजे शयन आरती की परंपरा है। बतातें हैं कि दोपहर में बारह बजे भोग आरती के बाद हनुमान जी शयन में चले जाते हैं। पुन: तीन बजे उन्हें जल दिखाकर जगाया जाता है। पूजा के लिए हनुमानगढ़ी में प्रत्येक साल आठ पुजारियों की नियुक्ति की जाती है। कम से कम चार पुजारी प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा पद्घति का अनुपालन करते हैं।

नवाब वाजिद अली शाह ने कराया था हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्धार...
हनुमानगढ़ी के जीर्णोद्घार के पीछे सद्भाव की एक रोचक कहानी है।  पुजारी राजूदास बताते हैं कि तत्कालीन मुस्लिम शासक नवाब वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्घार कराया था। एक बार नवाब वाजिद अली कहीं चढ़ाई पर जा रहा था। तभी उसके मंत्री ने बताया कि अयोध्या में एक हनुमान पीर का मंदिर है, वहां एक सिद्घ फकीर रहते हैं। 

वाजिद अली कुष्ठ रोग से पीड़ित था। वाजिद अली ने अयोध्या हनुमानगढ़ी पहुंचकर बाबा अभयरामदास से मुलाकत की। जब वह अभयरामदास से मिलने पहुंचा तो बाबा ने उसे चिमटे से मारकर कहा यहां से चले जाओ। वाजिद अली जैसे ही हनुमानगढ़ी से बाहर निकला उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया। जिसके बाद वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी की मरम्मत के लिए अभयरामदास से मिन्नतें की, बहुत मिन्नत के बाद बाबा ने इजाजत दी और वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्घार कराया।
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