पुजारी राजूदास बताते हैं कि हनुमान जी महाराज की पूजापद्घति के अंतर्गत हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमान जी की आरती पांच बार की जाती है। सुबह चार बजे मंगला आरती, पांच बजे श्रृंगार आरती, 12 बजे दोपहर में भोग आरती, रात्रि 9 बजे संध्या आरती और रात्रि 10 बजे शयन आरती की परंपरा है। बतातें हैं कि दोपहर में बारह बजे भोग आरती के बाद हनुमान जी शयन में चले जाते हैं। पुन: तीन बजे उन्हें जल दिखाकर जगाया जाता है। पूजा के लिए हनुमानगढ़ी में प्रत्येक साल आठ पुजारियों की नियुक्ति की जाती है। कम से कम चार पुजारी प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा पद्घति का अनुपालन करते हैं।
नवाब वाजिद अली शाह ने कराया था हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्धार...
हनुमानगढ़ी के जीर्णोद्घार के पीछे सद्भाव की एक रोचक कहानी है। पुजारी राजूदास बताते हैं कि तत्कालीन मुस्लिम शासक नवाब वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्घार कराया था। एक बार नवाब वाजिद अली कहीं चढ़ाई पर जा रहा था। तभी उसके मंत्री ने बताया कि अयोध्या में एक हनुमान पीर का मंदिर है, वहां एक सिद्घ फकीर रहते हैं।
वाजिद अली कुष्ठ रोग से पीड़ित था। वाजिद अली ने अयोध्या हनुमानगढ़ी पहुंचकर बाबा अभयरामदास से मुलाकत की। जब वह अभयरामदास से मिलने पहुंचा तो बाबा ने उसे चिमटे से मारकर कहा यहां से चले जाओ। वाजिद अली जैसे ही हनुमानगढ़ी से बाहर निकला उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया। जिसके बाद वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी की मरम्मत के लिए अभयरामदास से मिन्नतें की, बहुत मिन्नत के बाद बाबा ने इजाजत दी और वाजिद अली शाह ने हनुमानगढ़ी का जीर्णोद्घार कराया।