अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिकों ने आमजन से बिजली गिरने से पूर्व चेतावनी देने वाले दामिनी एप को मोबाइल में डाउनलोड करने का आग्रह किया है। बिजली गिरने से कुछ दिन पहले ही अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में कई लोगों की जान चली गई थी।
बज्रपात जैसी घटनाओं के पूर्वानुमान से लोगों को सचेत करने की दृष्टि से इंडियन इंस्टीट्यूट अप ट्रॉपिकल ने देश के विभिन्न हिस्सों में 48 सेंसर के साथ एक लाइटनिंग लोकेशन नेटवर्क स्थापित किया है। यह नेटवर्क बिजली के लाइटनिंग व बज्रपात के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है। इस कार्यक्रम को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए और ज्यादा सेंसर लगाने पर भी कार्य किया जा रहा है।
इसी पूर्वानुमान उपायों व तकनीकी के साथ आईआईटीएम ने एक वैज्ञानिक एप दामिनी विकसित किया है। यह एप लाइटनिंग हमलों की सटीक जानकारी के साथ बज्रपात की घटनाओं का 40 किमी. की परिधि तक सटीक अनुमान देने में सक्षम है।
दामिनी एप विशेषरूप से आकाशीय विद्युत की गतिविधियों के विषय में अग्रिम जानकारी दे सकता है। विगत दिनों बिजली गिरने से होने वाली मौत की घटनाओं के दृष्टिगत आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सीताराम मिश्र व उनकी टीम को निर्देशित किया कि अब जब पूर्वानुमान व सटीक जानकारी देने वाली दामिनी एप का विकास हो चुका है तो इस विषय में आमजन मानस को तेजी से अवगत कराया जाय, जिससे लोग स्वयं व अन्य संबंधियों को बिजली व बज्रपात की घटना की संभावना बताकर खुले आसमान के नीचे वर्षा के दौरान जाने से रोक सकें। डॉ. सीताराम मिश्र ने बताया कि बज्रपात से देश में प्रतिवर्ष दो हजार से ढाई हजार लोगों की असामायिक मृत्यु होती है।
एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2019 में 3 करोड़ 22 लाख 38 हजार 6 सौ 67 बार बिजली की घटनाएं घटी हैं। किसान भाई समेत आमजन दामिनी एप को गूगल प्ले स्टोर पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं तथा अपनी लोकेशन अपडेट कर अपने निकट होने वाली ऐसी घटनाओं से सुरक्षित हो सकते हैं।