अयोध्या। सरयू की कछार मेंं सेना के लिए अधिसूचित भूमि का दुरुपयोग कानून की अवमानना के दायरे में होगा। भूमि के स्वामित्व का परीक्षण कराए बगैर अयोध्या विकास प्राधिकरण नक्शा नहीं पास करेगा। यह आदेश सेना की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर दाखिल की गई याचिका में लखनऊ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एआर मसूदी और ओपी शुक्ल की बेंच ने दिया है।
मामला सोहावल और सदर तहसील क्षेत्र के सरयू के किनारे वाले क्षेत्रों का है। सदर तहसील में शहर के छावनी क्षेत्र से सोहावल तहसील क्षेत्र के कोटसराय गांव तक 14 गांवों की 13,391 एकड़ जमीन को सेना के लिए अधिसूचित किया गया है। इसको लेकर राज्यपाल की ओर से युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने, तोप दागने का अभ्यास (अधिनियम संख्या पांच सन् 1938) के तहत 20 जनवरी 2021 को पांच साल के लिए प्राधिकृत किया गया है। इस जमीन पर भू-माफिया ने काश्तकारों के साथ मिलकर अलग-अलग गांवों की जमीन की खरीद फरोख्त कर मकान और कालोनी विकसित करके अतिक्रमण शुरू कर दिया था। मामला सतह पर आने के बाद सेना ने 11 फरवरी 2023 को जिलाधिकारी को पत्र लिखा। इसमें सेना के लिए अधिसूचित भूमि से अतिक्रमण हटवाए जाने का आग्रह किया था। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
इसी मामले को लेकर याचिकाकर्ता बनबीरपुर निवासी प्रवीण कुमार के अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्रा और अखिलेश कुमार पांडेय ने याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता मिश्र व पांडेय ने बताया कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि 13,391 एकड़ भूमि को खास उद्देश्य के लिए सुरक्षित किया गया है। इस भूमि पर किए गए अतिक्रमण पर प्रारंभिक तौर पर रक्षा मंत्रालय (सेना) से स्वयं देखभाल की जाएगी, लेकिन सेना के आग्रह पर सहयोग करना प्रशासन के लिए बाध्यकारी होगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अन्यथा वह कानून की अवमानना होगी। न्यायालय ने अयोध्या विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि भूमि के स्वामित्व का उचित परीक्षण कराए बिना प्लान स्वीकृत नहीं किया जाएगा।