मनरेगा से बनवाए गए तालाब सूखे हैं। इनमें पानी नहीं है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के दो ब्लॉकों में जल स्तर की स्थिति ठीक नहीं है। यह डार्क जोन में है।
बादलों की लुकाछिपी का खेल जारी है। सबकी आंखें बारिश की फुहारों का इंतजार कर ही है। लेकिन अभी तक लगातार मानसूनी बारिश नहीं हुई। धान की रोपाई शुरू हो गई।
किसान निजी नलकूपों से सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम कर रहा है। लेकिन इससे खेती की लागत बढ़ जा रही है। जिले में अभी तक सिर्फ 50 मिलीलीटर बारिश हुई है।
बारिश के पानी के संचयन से गर्मी के दिनों में पानी के संकट को कुछ कम किया जा सकता है। लेकिन वर्षा जल के संचयन के प्रति जमीनी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखती।
जिले में कमिश्नर, जिलाधिकारी आवास सहित कुछ अफसरों के आवास, कृषि भवन, फैजाबाद-अयोध्या विकास प्राधिकरण और विकास भवन जैसे कुछ महत्वपूर्ण इमारतों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था है।
इन इमारतों में बारिश का पानी एकत्रित होता है तथा वह पुन: पाइप के सहारे धरती में चला जाता है। निजी मकानों में वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था जरूरी है लेकिन इसके प्रति भवन आम लोगों में उदासीनता है।
बारिश के पानी का संचयन करने की व्यवस्था निजी मकानों में कम ही दिखती है। प्राधिकरण का कहना है कि मकान बनाने वालों के लिए यह आवश्यक है।
जिले के 11 विकास खंडों में मनरेगा के तकरीबन दो हजार तालाब है। जिला प्रशासन ने इन तालाबों को भरने का निर्देश भी दिया है। लेकिन ज्यादातर गांवों में तालाबों के भरने के प्रति प्रधानों ने खास रुचि नहीं दिखाई।
हाल यह है कि अधिकतर तालाबों की तलहटी सूखी हुई है और उसमें पपड़ी पड़ गई है। मसौधा प्रतिनिधि के अनुसार कल्यान भदरसा, मिर्जापुर निमौली, नैपुरा, आदि गांवों में बने मनरेगा के तालाब में पानी नहीं है।
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के दो ब्लॉक हैरिंग्टनगंज व मिल्कीपुर में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे गिर चुका है। हाल यह है कि यहां के कई गांवों में नलकूप व हैंडपंप पानी छोड़ चुके है।
भूमि संरक्षण विभाग ने हैरिंग्टनगंज में जल संरक्षण के उपाय किए लेकिन वह ज्यादा कारगर नहीं रहा। खेत का पानी खेत में रहे, इसके लिए मेड़ बंदी कराई गई।
बारिश नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है। भूजल स्तर नीचे होने के कारण नलकूप जवाब दे रहे है। डीजल के मंहगा होने के कारण पंपिंग सेट चलाना भी मुश्किल है।
मुख्य नहर में पानी तो है लेकिन माइनरों की सफाई नहीं होने के कारण उसमें पानी नहीं है। इसके कारण किसानों के खेतों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
अकवारा के किसान रामधनी वर्मा ने कहा कि नहर में पानी तो है लेकिन माइनर में जल नहीं है। करमा कोड़री के रामजीत, मधुपुर के अशोक कुमार पाल व सत्यप्रकाश मिश्रा आदि किसानों ने कहा कि बिन पानी सब सून जैसी स्थिति है।
जिला विकास अधिकारी अभिराम त्रिवेदी ने कहा कि नहरों या ट्यूबवेलों के पास के तालाबों को इनके पानी से भरने के लिए पहले ही कहा गया। भूमिगत जल में वृद्धि के लिए मनरेगा तालाबों की व्यवस्था की गई है।